Gujarat News: गुजरात सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण सुधार किया है. गुजरात राज्य सेवा (चिकित्सा उपचार) नियमों, 2002 के तहत अब परिवार की परिभाषा अधिक व्यापक बन गई है. नए सुधारों के अनुसार, कर्मचारी पर आर्थिक रूप से निर्भर होने वाले सदस्यों को भी मेडिकल बेनिफिट्स मिलेंगे. इसके लिए आधिकारिक परिपत्र जारी किया गया है.
इस सुधार से पहले, चिकित्सा लाभ केवल पति/पत्नी, बच्चों और माता-पिता तक ही सीमित था. अब इसमें निर्भर भाई-बहन और दत्तक संतान भी शामिल किए गए हैं. यह सुधार राज्य के लाखों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आएगा और बीमारी के समय परिवार के अन्य सदस्यों के इलाज का बोझ कम करेगा.
‘परिवार’ की पुरानी परिभाषा को रद्द कर
सरकार ने पुराने नियमों में ‘परिवार’ की परिभाषा को रद्द कर इसे अधिक समावेशी बनाया है. नई परिभाषा के अनुसार, पति या पत्नी, बच्चे, माता-पिता, भाई-बहन और दत्तक संतान अब चिकित्सा लाभ प्राप्त कर सकते हैं, बशर्ते वे कर्मचारी के साथ रहते हों.
आर्थिक निर्भरता के लिए सरकार ने सीमा तय की है. यदि परिवार के सदस्य की सभी स्रोतों (पेंशन सहित) से होने वाली मासिक आय ₹500 से अधिक नहीं है, तो उन्हें कर्मचारी पर पूर्णतः आश्रित माना जाएगा और ये सदस्य मेडिकल बेनिफिट्स के हकदार होंगे.
यह सुधार तत्काल प्रभाव से लागू किया गया
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह सुधार तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है. इससे सरकारी परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी और बीमारी के समय परिवार के अन्य सदस्यों का उपचार बोझ हल्का होगा.
इस नए सुधार के बाद कर्मचारियों को चिकित्सा लाभों में अधिक स्पष्टता मिलेगी और निर्भर परिवार के सदस्यों को भी उचित उपचार सुविधा का लाभ मिलेगा. अब कर्मचारियों के साथ रहने वाले माता-पिता, पत्नी/पति, संतानों के अलावा अन्य निर्भर सदस्य भी कुछ परिस्थितियों में मेडिकल बेनिफिट्स का लाभ प्राप्त कर सकेंगे.