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यूपी में 33 सालों तक शख्स ने दो सरकारी विभागों में की नौकरी, अब कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा

फर्जीवाड़ा कर दो जिलों के अलग-अलग सरकारी विभागों में लंबे समय तक नौकरी करने का हैरान करने वाला मामला बाराबंकी से सामने आया है, आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे लगभग 33 वर्षों तक दो सरकारी विभागों से वेतन और भत्ते का लाभ लिया है. बहरहाल इस मामले में बाराबंकी की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 7 साल की कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही शख्स पर 30 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है.

जानकारी के अनुसार, आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे लगभग 33 वर्षों तक दो सरकारी विभागों से वेतन और भत्ते का लाभ उठाया. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) बाराबंकी ने दोषी पर 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. अदालत ने अवैध रूप से लिए गए वेतन की वसूली का आदेश भी दिया है. 

दो अलग-अलग विभागों में किया कार्य

इस बाबत अधिवक्ता प्रेम शंकर वर्मा ने बताया कि, दोषी की पहचान बाराबंकी के सतरिख थाना क्षेत्र के नरौली गांव के रहने वाले जय प्रकाश सिंह के रूप में हुई है. उन्होंने जानकारी दी है कि जांच में सामने आया कि जय प्रकाश सिंह ने एक ही समय में दो अलग-अलग सरकारी पदों पर कार्य किया.

बाराबंकी के साथ प्रतापगढ़ में नौकरी करता रहा जालसाज

बताया गया जालसाज जय प्रकाश सिंह यहां बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पर तैनात था. इसके साथ ही वह प्रतापगढ़ जिले में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत नॉन-मेडिकल असिस्टेंट (NMA) के रूप में कार्यरत था. आरोपी ने चतुराई से दो विभागों को अंधेरे में रखा और दशकों तक दोहरा लाभ उठाता रहा. 

RTI से हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा

बताया कि इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) के जरिए आरोपी की नियुक्तियों और दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई. जांच में पाया गया कि जय प्रकाश सिंह ने एक ही मार्कशीट और कूटरचित (फर्जी) दस्तावेजों का उपयोग कर दोनों जगहों पर नियुक्ति प्राप्त की थी. 

लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने सुनाया फैसला

इसके बाद मामला पुलिस के पास पहुंचा और एफआईआर दर्ज होने के बाद अदालत की दहलीज तक पहुंचा. सीजेएम कोर्ट की न्यायाधीश सुधा सिंह ने मामले की लंबी सुनवाई और सबूतों के आधार पर जय प्रकाश सिंह को दोषी करार दिया. अदालत ने टिप्पणी की है कि इस प्रकार की धोखाधड़ी न केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि योग्य उम्मीदवारों के हक को भी छीनती है.

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