बिहार के शेखपुरा जिला में एक युवक द्वारा संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा की परीक्षा में 440वीं रैंक आने का फर्जी दावा करने का मामला सामने आया है.
फतेहपुर गांव के रहने वाले रंजीत कुमार ने 6 मार्च को यूपीएससी का परिणाम घोषित होने के बाद खुद को ऑल इंडिया रैंक 440 प्राप्त करने वाला अभ्यर्थी बताकर लोगों को गुमराह किया. उसके इस दावे के बाद गांव में खुशी का माहौल बन गया और लोगों ने उसे बधाइयां देनी शुरू कर दीं. स्थानीय स्तर पर उसकी उपलब्धि की चर्चा होने लगी और बिना सत्यापन के ही उसे सम्मानित भी कर दिया गया.
यहां तक कि माहुली थाना के थानाध्यक्ष ने भी उसे माला पहनाकर सम्मानित किया था. हालांकि बाद में जांच में पता चला कि 440वीं रैंक बिहार के रंजीत कुमार की नहीं, बल्कि कर्नाटक के रंजीथ कुमार की है.
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गायब हो गया शेखपुरा का रंजीत
आरोपी ने नाम में ‘रंजीत’ और ‘रंजीथ’ के अंतर का फायदा उठाकर लोगों को भ्रमित किया. जब पुलिस और प्रशासन को शक हुआ और उससे यूपीएससी से जुड़े दस्तावेज दिखाने को कहा गया, तो वह अचानक गायब हो गया.
बताया जा रहा है कि रंजीत कुमार दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता था. मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस उसकी तलाश में जुट गई है. इस घटना ने बिना सत्यापन के किसी को सम्मानित करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
रंजीत का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वह इलाके एक एसएचओ को बताते हुए दिख रहा है कि उसने कितना संघर्ष किया. इसके साथ ही एक अन्य वीडियो में रंजीत बता रहा है कि पूर्व राष्ट्रपति अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम उसके प्रेरणास्रोत हैं.