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Haridwar News: अर्धकुंभ 2027 की तैयारियां तेज, गंगा की सफाई के लिए विशेष योजना, लगेंगे 6 ट्रीटमेंट प्लांट

उत्तराखंड के हरिद्वार में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेला 2027 की तैयारियां अब तेज होती नजर आ रही हैं. करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए मेला प्रशासन गंगा की निर्मलता और मेला क्षेत्र की स्वच्छता को लेकर विशेष रणनीति तैयार कर रहा है. इसी कड़ी में मेलाधिकारी सोनिका की पहल पर राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन यानी NMCG के विशेषज्ञों की टीम ने अर्धकुंभ मेला क्षेत्र का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया.

NMCG की विशेषज्ञ टीम ने हरकी पैड़ी, बैरागी कैंप, कनखल, नीलधारा और दक्ष द्वीप सहित कई प्रमुख स्थलों का दौरा किया. टीम ने इन सभी स्थानों पर स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं और प्रस्तावित योजनाओं का बारीकी से जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने मेला क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों और सुधार की संभावनाओं पर गहन अध्ययन किया. अर्धकुंभ जैसे विशाल आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच स्वच्छता बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है.

 मेलाधिकारी सोनिका की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक

निरीक्षण के बाद मेलाधिकारी सोनिका की अध्यक्षता में मेला प्रशासन, नगर निगम और पेयजल निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में अर्धकुंभ मेले के दौरान बेहतर सैनिटेशन और सीवरेज प्रबंधन सुनिश्चित करने पर विस्तार से चर्चा हुई. सभी विभागों के बीच समन्वय बनाकर एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया.

 कचरा संग्रहण से लेकर शौचालय तक की व्यापक व्यवस्था

अधिकारियों ने बताया कि अर्धकुंभ क्षेत्र में कचरा संग्रहण, पृथक्करण और निस्तारण की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा. मेला क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में अस्थायी शौचालय, कूड़ेदान और अपशिष्ट परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी. गंगा की स्वच्छता और मेला क्षेत्र को साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक और टिकाऊ व्यवस्थाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

 6 फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना

अर्धकुंभ 2027 में गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए एक अहम कदम उठाया जा रहा है. मेला क्षेत्र में कुल छह फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई गई है. यह प्लांट मेला क्षेत्र से निकलने वाले मानव अपशिष्ट के वैज्ञानिक तरीके से निपटारे में अहम भूमिका निभाएंगे जिससे गंगा में प्रदूषण का खतरा काफी कम हो जाएगा. प्रशासन का लक्ष्य है कि अर्धकुंभ 2027 स्वच्छता के मामले में एक नई मिसाल कायम करे और श्रद्धालुओं को स्वच्छ गंगा के दर्शन हों.

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