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बुलंदशहर की शिखा का IAS बनने का दावा निकला फर्जी, जश्न में शामिल हुए थे 1200 लोग, अब कहा- गलती हो गई

UPSC सिविल सर्विस एग्जाम का रिजल्ट घोषित होने के बाद उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में जश्न का माहौल शुरू हो गया. बुलंदशहर की शिखा गौतम ने खूब तैयारी कर के यूपीएससी का एग्जाम दिया था. उसे लगा कि उसे अपनी मेहनत का फल मिल गया है और लिस्ट में 113वें नंबर पर उसका नाम आ गया, लेकिन शिखा ने केवल अपना नाम ही देखा था, रोल नंबर नहीं. असल में जो शिखा ने IAS बनी, वो हरियाणा की रहने वाली थी.

इस बीच बुलंदशहर की शिखा गौतम रिजल्ट देखकर भावुक हो गई और बिना अधिक जानकारी लिए उसने परिवार और रिश्तेदारों में जानकारी दे दी कि वह IAS बन गई है. गांव में जश्न का माहौल बन गया. ढोल-नगाड़ों के साथ शिखा का स्वागत किया गया. जश्न में करीब 1200 लोग शामिल हुए. शिखा की आरती उतारी गई और लोग नाचने-गाने लगे.

फिर अचानक, शिखा गौतम और उसके परिवार का सपना टूट गया. पता चला कि उसने रिजल्ट देखने में गलती कर दी है. जल्दबाजी में शिखा गौतम ने केवल अपना नाम देखा लेकिन रोल नंबर की जांच करना भूल गई, जो उसका नहीं था. 

‘मुझसे गलती हो गई, रोल नंबर नहीं चेक किया’- शिखा

जब इस बारे में शिखा गौतम से बात की गई तो उन्होंने कहा- ‘मुझसे गलती हो गई’. न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में उसने कहा, “वह दूसरी शिखा हैं जिनका सिलेक्शन हुआ है. उनका नाम भी शिखा है और मेरा भी. मैंने रिजल्ट के पीडीएफ में केवल नाम ही चेक किया था और यही मुझसे गलती हो गई. मुझे नाम के साथ रोल नंबर भी चेक करना चाहिए था.”

रिजल्ट देखकर भावुक हो गई थी शिखा, जल्दबाजी में की गलती

वहीं, शिखा के पिता प्रेमचंद ने बताया, “उसने लिस्ट में अपना नाम देखते ही हमें बता दिया कि उसका IAS में सिलेक्शन हो गया है. हमें यह पता नहीं कि दूसरी शिखा कौन है, जिसका असल में सिलेक्शन हुआ था, मेरी बेटी का नहीं. हम उस समय घर पर भी नहीं थे. अपनी पत्नी का ऑपरेशन करा रहे थे. खुशी के मारे शिखा भावुक हो गई, उसने पूरी जानकारी नहीं देखी केवल अपना नाम देखा. उससे गलती हो गई.”

इससे पहले गौतम परिवार में जश्न का माहौल चल रहा था. 8 मार्च को शिखा के भाई ने जानकारी दी थी कि उनकी तीसरी बहन शिखा ने UPSC के दूसरे अटेंप्ट में ही 113वीं रैंक हासिल की है. उनका कहना था कि शिखा ने शुरू से ही अच्छे स्तर पर मेहनत की. वह शुरू से ही पढ़ने में अच्छी रही है, उसकी लगन अच्छी थी. 10वीं बुलंदशहर से ही किया, 12वीं गांधी बाल निकेतन से किया और IP कॉलेज में B.Sc की डिग्री ली. फिर बीटीसी किया.

पहले टीचर बनना चाहती थी शिखा 

भाई ने आगे बताया कि शिखा का पहले विजन था कि वह टीचर बने, क्योंकि हमारे पिताजी शिक्षा विभाग में हैं और इंदिरा गांधी कन्या इंटर कॉलेज में दफ्तरी के पद पर हैं. उनकी जॉब फोर्थ क्लास की है, लेकिन माता पिता ने सभी बच्चों को पढ़ाने में बहुत संघर्ष किया है. हम सभी को शिक्षित बनाया है. मेरी बाकी दोनों बहनें टीचर हैं, एक बहराइच में और एक बिहार में. तीसरे नंबर की बहन शिक्षा अब IAS बन गई है. सबसे छोटी बहन भी पुलिस की तैयारी कर रही है. 

शिखा गौतम की माता जी गृहिणी हैं, वो ज्यादा पढ़ी नहीं सकीं. पिताजी 10वीं पास हैं. मोनू ने कहा, “छोटी सी नौकरी में उन्होंने हमें किसी चीज की कमी नहीं होने दी. आज हमें बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि हमारी बहन ने सबका नाम रोशन कर दिया है. हमारे समाज, हमारे जिले का नाम रोशन किया है.”

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