उत्तराखंड में पर्यटन सीजन से ठीक पहले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की किल्लत ने होटल और हॉस्पिटैलिटी उद्योग की चिंता बढ़ा दी है. कई जिलों में कमर्शियल गैस की सप्लाई बाधित होने से होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
देहरादून समेत कई जिलों में मंगलवार दोपहर बाद कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का स्टॉक खत्म होने की खबर सामने आई. होटल और रेस्टोरेंट संचालक गैस एजेंसियों के चक्कर लगाते रहे लेकिन सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो सके.
नैनीताल होटल एसोसिएशन अध्यक्ष बोले
नैनीताल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय बिष्ट ने बताया कि उत्तराखंड में पर्यटन गतिविधियां तेजी से बढ़ने वाली हैं और ऐसे समय में कमर्शियल गैस की कमी से होटल और रेस्टोरेंट संचालन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. उन्होंने कहा कि पर्यटकों और होटल कर्मचारियों के भोजन की पूरी व्यवस्था कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर रहती है. यदि जल्द सप्लाई नहीं मिली तो कई प्रतिष्ठानों को अपना संचालन सीमित करना पड़ सकता है.
4500 होटल और 6000 होमस्टे पर संकट
उत्तराखंड में करीब 4500 से अधिक होटल और लगभग 6000 होमस्टे संचालित हो रहे हैं. अकेले नैनीताल में करीब 400 होटल और होमस्टे तथा लगभग 200 रेस्टोरेंट हैं. मसूरी में करीब 325 होमस्टे और 225 होटल हैं जबकि हरिद्वार और टिहरी जैसे जिलों में भी सैकड़ों पर्यटन इकाइयां संचालित हो रही हैं. राज्य में Indian Oil, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum की करीब 350 गैस एजेंसियां हैं जिनके पास लगभग 29 लाख घरेलू और करीब 55 हजार व्यावसायिक उपभोक्ता पंजीकृत हैं.
वैश्विक तनाव का असर
बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव का असर एलपीजी आपूर्ति पर भी पड़ रहा है. ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध जैसे हालातों के चलते वैश्विक आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है जिसका सीधा असर भारत में कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई पर देखने को मिल रहा है.
जिला पूर्ति अधिकारी बोले
जिला पूर्ति विभाग ने एजेंसियों के स्टॉक की जांच शुरू कर दी है और गैस बुकिंग तथा डिलीवरी की रोजाना मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि कालाबाजारी रोकी जा सके. जिला पूर्ति अधिकारी मुकेश पाल ने बताया कि घरेलू गैस की सप्लाई पर्याप्त है और उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है. हालांकि घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के बाद अब 25 दिन का अंतराल अनिवार्य कर दिया गया है.