बिहार राज्यसभा चुनाव में बेहद दिलचस्प मुकाबला दिख रहा है. राज्य की 5 सीटों पर 16 मार्च को वोटिंग होगी. इस बीच 5वीं सीट के लिए पेच फंसा हुआ है. विधानसभा में सीटों के हिसाब से 4 सीटें एनडीए गठबंधन का जीतना तय है. वहीं 5वीं सीट एनडीए और आरजेडी के बीच तीन-छह की गणित में फंस गई है.
बता दें कि एक राज्यसभा सीट को जीतने के लिए 41 विधायकों की जरूरत होती है. ऐसे में बीजेपी गठबंधन के पास 202 विधायक हैं. जिससे 4 सीटों पर आसानी से जीतना लगभग तय माना जा रहा है. लेकिन 5वीं सीट के लिए एनडीए को 3 विधायकों की जरूरत है.
क्या है तीन व छह का गणित?
बीजेपी गठबंधन के पास 5वीं सीट के लिए 38 विधायक हैं. अब बीजेपी को एक सीट जीतने के लिए 3 विधायकों की जरूरत है, तो वहीं आरजेडी के पास 35 विधायक हैं. इससे राजद को राज्यसभा सीट जीतने के लिए 6 विधायकों की आवश्यकता है. जिससे यह सीट राजद के खाते में जा सकती है.
इस बीच तीन-छह के गणित में बसपा और एआईएमआईएम किंगमेकर की भूमिका में हैं. दरअसल ओवैसी की पार्टी के पास 5 विधायक हैं, जबकि बसपा का 1 विधायक है. अब यह 6 विधायक अगर आरजेडी के साथ जाते हैं तो उनका जीतना संभव है. वहीं अगर इनमें से तीन का साथ बीजेपी को मिल गया तो 5 सीटों पर बीजेपी क्लीन स्वीप मार सकती है.
दोनों गुट झोंक रहे हैं ताकत
ऐसे में इस सीट को जीतने के लिए दोनों ही राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं. बता दें कि कुछ छोटे दलों के तीन से छह वोट ऐसे हैं जो इस पांचवी सीट के परिणाम को बदल सकते हैं. वहीं चर्चा यह भी है कि इस चुनाव में अगर क्रॉस वोटिंग होती है तो भी समीकरण पलट सकते हैं.
इस बीच दोनों ही गुट अपने-अपने विधायकों को एक साथ रखने की कोशिश में हैं. साथ ही वह अतिरिक्त समर्थन जुटाने में भी लगे हुए हैं. ऐसे में महागठबंधन अपने विधायकों को एकजुटता का संदेश दे चुका है. हलांकि राजद की बैठक में ओवैसी और बसपा के विधायक का शामिल न होना 6 सीटों के गणित को बिगाड़ सकता है.
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