ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद कश्मीर में हालात बिगड़ गए थे. जगह-जगह कड़ी चिंता जताते हुए प्रदर्शन किया. NIA की जांच में आई देरी के बाद कोर्ट से 10 दिन की और पुलिस कस्टडी मांगी है. आतंकी फंडिंग से जुड़े एक मामले में जांच एजेंसी एनआईए ने पटियाला हाउस की स्पेशल एनआईए कोर्ट को बताया कि जम्मू-कश्मीर में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब होने की वजह से जांच में देरी हुई है.
एनआईए ने कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद घाटी में कई जगह विरोध-प्रदर्शन और तनाव का माहौल बन गया था, जिसके कारण जांच से जुड़ी कुछ अहम कार्रवाई समय पर नहीं हो सकी. जांच एजेंसी NIA ने कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा कि कश्मीर में पॉइंटिंग आउट की प्रक्रिया पूरी नहीं कराई जा सकी. इस प्रक्रिया के तहत आरोपियों को उन जगहों पर ले जाया जाता है, जहां उन्होंने कथित तौर पर हथियार और गोला-बारूद छिपाने की बात कबूल की होती है.
‘प्रदर्शन के दौरान फील्ड जांच करना संभव नहीं था’
केंद्रीय जांच एजेंसी के मुताबिक उस समय घाटी में विरोध-प्रदर्शन और सुरक्षा संबंधी जोखिम के कारण इस तरह की फील्ड जांच करना संभव नहीं था. दरअसल जांच एजेंसी NIA ने तुफैल अहमद भट और जमीर अहमद अहंगर को 25 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया था.
एनआईए ने आरोपियों पर लगाया आरोप
जांच एजेंसी एनआईए का आरोप है कि दोनों आरोपी भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं और आतंकवादी गतिविधियों के लिए हथियारों की खरीद-फरोख्त और सप्लाई से जुड़े हुए हैं. जांच एजेंसी के अनुसार पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपी जमीर अहमद अहंगर सोशल मीडिया के जरिए एक विदेशी हैंडलर के संपर्क में था.
यह विदेशी हैंडलर कथित तौर पर एक आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है और उसी के निर्देश पर भारत में हथियार जुटाने और आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रची जा रही थी. NIA ने कोर्ट को यह भी बताया कि तकनीकी कारणों की वजह से भी जांच की गति धीमी पड़ी है.
आरोपियों के कश्मीर स्थित मोबाइल नंबरों की डुप्लीकेट सिम कार्ड अभी तक टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं से नहीं मिले हैं. इन सिम कार्ड के बिना आरोपियों के सोशल मीडिया अकाउंट, चैट रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूतों की पूरी तरह जांच और डेटा एक्सट्रैक्शन नहीं हो पा रहा है.
10 दिन की पुलिस कस्टडी की मांग
जांच एजेंसी एनआईए ने कोर्ट से दोनों आरोपियों की 10 दिन की और पुलिस कस्टडी देने की मांग की है. NIA का कहना है कि आगे की पूछताछ के लिए आरोपियों की मौजूदगी जरूरी है. एजेंसी आरोपियों के सामने उनके सोशल मीडिया डेटा को निकालकर उससे जुड़े सवाल पूछना चाहती है.
साथ ही जांच के दौरान सामने आए वित्तीय लेन-देन के बारे में भी उनसे पूछताछ की जाएगी. इसके अलावा NIA ने कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट की इजाजत के मुताबिक आरोपियों के बायोलॉजिकल सैंपल, हैंडराइटिंग और सिग्नेचर सैंपल भी लिए जाने हैं.
ताकि जांच में जुटाए गए दस्तावेजों और सबूतों का मिलान किया जा सके. एजेंसी यह भी चाहती है कि आरोपियों का आमना-सामना अन्य सह-आरोपियों और गवाहों से कराया जाए, जिससे इस कथित आतंकी साजिश के पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों का पता लगाया जा सके.
ये भी पढ़ें: जम्मू में फारूक अब्दुल्ला पर फायरिंग, शादी के कार्यक्रम में हमले की कोशिश, सामने आया वीडियो