उत्तर प्रदेश में गंगा को साफ और प्रदूषण मुक्त बनाने के अभियान को नई गति मिली है. जल शक्ति मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार साल 2023 से 2025 के बीच राज्य में सीवेज ट्रीटमेंट, नदी संरक्षण और जल आपूर्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं. इन योजनाओं का उद्देश्य गंगा और उससे जुड़ी नदियों को प्रदूषण से बचाना और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है.
20 एमएलडी क्षमता का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट किया गया तैयार
नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत कानपुर के जाजमऊ में 20 एमएलडी क्षमता का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया गया है. करीब 741 करोड़ रुपये की लागत से बने इस प्लांट का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी को ट्रीट करना है, ताकि बिना शुद्ध किए हुए पानी को गंगा में जाने से रोका जा सके. इससे गंगा के जल की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद है. रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में भी कई बड़े प्रोजेक्ट पूरे किए गए.
बुलंदशहर में लगभग 790 करोड़ रुपये की विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन किया गया, जबकि आजमगढ़ में करीब 1,114 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू की गईं. इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहरों में सीवेज प्रबंधन को मजबूत करना और नदियों में गिरने वाले प्रदूषण को कम करना है.
नदी संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान शुरू
मथुरा, मुरादाबाद, प्रयागराज और जौनपुर जैसे शहरों में नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए गए हैं. वहीं पुराने सीवर नेटवर्क को भी दुरुस्त और मजबूत किया गया है, ताकि बिना ट्रीट किया गया गंदा पानी सीधे नदियों में न पहुंचे. नदी संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए गोरखपुर, मथुरा-वृंदावन और मिर्जापुर में अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान शुरू किए गए हैं. इसके साथ ही 282 फ्लडप्लेन वेटलैंड्स को संरक्षण के लिए चिन्हित किया गया है और लगभग 466 हेक्टेयर क्षेत्र में सात बायोडायवर्सिटी पार्क विकसित किए गए हैं.
जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में सोनार तकनीक से नदी तल की मैपिंग और भूजल रिचार्ज पर भी काम किया जा रहा है, जिससे भविष्य में जल संरक्षण को और मजबूती मिल सके.