मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव रद्द करने के फैसले पर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की चाल, चरित्र और चेहरा लोकतंत्र विरोधी है और धीरे-धीरे जनता को इसके बारे में पता चल रहा है. उन्होंने कहा कि जिस तरह मध्य प्रदेश में आज से 6 साल पहले चुनी हुई सरकार को खरीद-बेच कर गिराया गया था, वह लोकतंत्र के इतिहास में एक काला अध्याय था.
जीतू पटवारी ने कहा, “बीजेपी ने हमारे कई विधायकों को खरीदा और बेचा और उसके बाद फिर से सत्ता बना ली. विजयपुर विधानसभा सीट की जीत लोकतंत्र को ताकत देने वाली और बीजेपी की सोच, साजिश और षड्यंत्र को धता बताने वाली थी. मगर ऐसे में एक आदिवासी विधायक का सामान्य सीट से चुनकर आना बीजेपी को नागवार गुजरा.”
विधायक मुकेश मल्होत्रा की हार-जीत को लेकर कोर्ट का फैसला आश्चर्यचकित है
उन्होंने कहा कि विधायक मुकेश मल्होत्रा की हार-जीत को लेकर कोर्ट का जो फैसला आया है, उससे लोग भी आश्चर्यचकित हैं. न्यायपालिका पर लोगों का जो भरोसा है, उस फैसले को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं. पटवारी ने कहा कि एक आदिवासी पर अपराध छुपाने का आरोप लगाया गया है, जबकि आपस में सिर्फ तू-तू, मैं-मैं और कहासुनी हुई थी, जिसे गंभीर रूप से नहीं लिया गया था. ऐसा में ये कोई बड़ा जुर्म नहीं था कि जिसका असर चुनाव पर प्रभाव पड़ता हो. इसके बावजूद फैसला बदलकर हारे हुए व्यक्ति को दोबारा विधायक बना देना न्यायपालिका पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है.
कांग्रेस मामले को लेकर आज ही सुप्रीम कोर्ट में दायर करेगी अपील
जीतू पटवारी ने कहा कि हमें सुप्रीम कोर्ट और न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और कांग्रेस इस मामले में आज ही सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पूरा पक्ष माननीय सुप्रीम कोर्ट के सामने रखेगी. इस पूरे घटनाक्रम को जोड़ते हुए उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को दलित विरोधी, आदिवासी विरोधी, लोकतंत्र विरोधी, संविधान विरोधी और बाबा साहेब अंबेडकर के विचारों के खिलाफ बताया. पटवारी ने उन प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि जो लोग वोट के अधिकार को ताकत देना चाहते हैं, उन्हें इस पूरे मामले को समझना चाहिए. उन्होंने आदिवासी समाज को मूल निवासी बताते हुए कहा कि अगर कोई आदिवासी सामान्य सीट से चुनाव जीत जाता है तो बीजेपी को यह बिल्कुल पसंद नहीं आता.
‘आदिवासी को उसके पद पर नहीं रहने देना, बीजेपी की सोच दिखाता है’
उन्होंने दलित समाज से भी आग्रह करते हुए कहा कि वे इस मामले को ध्यान से देखें और समझें कि बीजेपी एक तरफ अलग-अलग तरीकों से आपके सामने अलग-अलग बाते रखती है और दूसरी तरफ अपने ही आरक्षित वर्ग के साथी के साथ कितना बड़ा धोखा करती है. पटवारी ने आगे कहा कि बीजेपी के पास पूरी सरकार है और आधे से ज्यादा बहुमत भी उनके साथ है, फिर भी एक आदिवासी को पद पर नहीं रहने देना उनकी सोच को दिखाता है. उन्होंने कहा कि एक गरीब आदिवासी साथी, सहारिया परिवार से आने वाला व्यक्ति जब जनता के बीच से चुनकर विधायक बना, तो उसके साथ ऐसा करना भारतीय जनता पार्टी को शोभा नहीं देता.