गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने व सरकार के खिलाफ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 7 मार्च को वाराणसी से यात्रा शुरू की है, जो 11 मार्च को लखनऊ पहुंचेगी. यहां बड़ी धर्मसभा उर धरना शुरू किया जाएगा. लखनऊ में कानून व्यवस्था और ट्रैफिक की स्थिति को देखते हुए लखनऊ प्रशासन ने शर्तों के साथ कार्य्रकम स्थल और कार्यक्रम की मंजूरी दी है.
लखनऊ विकास प्राधिकरण ने कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, पर अनुमति दे दी है. इसके साथ ही पुलिस ने 26 शर्तों का पत्र भी सौंपा है. वहीं पुलिस ने एहतियात के तौर पर आशियाना, पीजीआई और कृष्णानगर थाने की फोर्स को अलर्ट मोड पर रखा है. आयोजन स्थल पर भी भारी बल तैनात रहेगा. माना जा रहा है कि बड़ी संख्या में साधू संत लखनऊ पहुंचेगे.
इन 26 शर्तें का पालन करना होगा
- धर्म, जाति, संप्रदाय व भाषा के विरुद्ध भड़काऊ भाषण नहीं होगा.
- किसी राजनीतिक/धार्मिक व्यक्ति पर अमर्यादित या विद्वेषपूर्ण भाषा नहीं होगी.
- नाबालिग बच्चों से विवादित नारे नहीं लगवाए जाएंगे.
- सीमित संख्या में वाहनों का प्रवेश, यातायात बाधित नहीं होगा.
- पारंपरिक ध्वजदंड के अलावा घातक वस्तु का प्रयोग नहीं होगा.
- मांगों का ज्ञापन सक्षम अधिकारी को सौंपा जाएगा.
- किसी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी आयोजकों की होगी.
- लगाए गए पुलिस बल का भुगतान आयोजक करेंगे.
- शांत क्षेत्र में ढोल, संगीत और लाउडस्पीकर प्रतिबंधित रहेंगे.
- यातायात और अग्निशमन विभाग के निर्देशों का पालन अनिवार्य.
- आवश्यक विभागीय अनुमति आयोजक स्वयं प्राप्त करेंगे.
- सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर वाहन पार्किंग नहीं होगी.
- ध्वनि प्रदूषण नियम-2000 के मानकों का पालन होगा.
- नियम उल्लंघन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत दंडनीय.
- अन्य आवश्यक अनुमति/लाइसेंस से छूट नहीं होगी.
- पुलिस द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा.
- ध्वनि स्तर निर्धारित सीमा (अधिकतम 75 डेसीबल) से अधिक नहीं होगा.
- आतिशबाजी, हथियार व हर्ष फायरिंग पूर्णतः प्रतिबंधित.
- पंडाल की ऊंचाई कम से कम 3 मीटर होगी.
- पर्याप्त निजी सुरक्षा कर्मी लगाए जाएंगे, अव्यवस्था नहीं होगी.
- सांप्रदायिक/जातीय टिप्पणी या उत्तेजक बयान नहीं होगा.
- रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ध्वनि प्रसारण बंद रहेगा.
- स्थान किराया व अन्य शुल्क आयोजक स्वयं देंगे.
- कोविड-19 गाइडलाइन का पालन होगा.
- जुलूस या शोभायात्रा की अनुमति नहीं होगी.
- किसी शर्त के उल्लंघन पर अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी.
माघ मेले से बिगड़ी बात
यहां बता दें कि जनवरी महीने में प्रयागराज में माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान से स्थानीय प्रशासन ने रोक दिया था, जिसके बाद सरकार और उनमें बिगड़ गयी. अविमुक्तेश्वरानंद बिना स्नान के ही लौट आए थे. यही नहीं इस पर राजनीति भी खूब हुई थी.