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MP Politics: ‘नहीं जाना चाहता राज्यसभा, लेकिन राजनीति से संन्यास…’, दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राजनीति से संन्यास लेने की अटकलों को खारिज करते हुए रविवार (8 मार्च) को कहा कि उन्होंने केवल पार्टी से अनुरोध किया है कि वर्तमान कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें राज्यसभा के लिए तीसरी बार उम्मीदवार नहीं बनाया जाए. सिंह ने कहा कि वह अंतिम सांस तक पार्टी की सेवा करते रहेंगे. वहीं सिंह के भविष्य की योजनाओं को लेकर अटकलें उस समय शुरू हुईं जब उन्होंने 5 मार्च को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें एक दंपति सेवानिवृत्ति के बाद देश के विभिन्न स्थानों की यात्रा करते दिख रहा है.

‘अंतिम सांस तक कांग्रेस की सेवा करते रहूंगा’- दिग्विजय सिंह

वीडियो साझा करते हुए सिंह ने लिखा था कि, ‘मेरी सेवानिवृत्ति की योजना? शायद. क्यों नहीं? जय सिया राम’ इससे यह अटकलें लगने लगीं कि वह सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का संकेत दे रहे हैं. सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने केवल कांग्रेस नेतृत्व से यह अनुरोध किया है कि राज्यसभा का उनका वर्तमान कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें राज्यसभा नहीं जाना है. उन्होंने कहा, ‘देखिए, इस तरह की चर्चा होती रहती है और आप जानते हैं कि यह कहां से आती है. बात इतनी ही है कि मैंने अपनी पार्टी से कहा है कि दूसरे कार्यकाल के बाद मैं तीसरी बार राज्यसभा नहीं जाना चाहता.’
 
कांग्रेस नेता सिंह ने कहा कि इसका अर्थ यह नहीं है कि वह पार्टी के लिए काम करना बंद कर देंगे, बल्कि वह अंतिम सांस तक कांग्रेस की सेवा करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि उन्हें क्या जिम्मेदारी दी जाएगी, यह पार्टी नेतृत्व, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) और मध्यप्रदेश कांग्रेस पर निर्भर करेगा.

प्रधानमंत्री से उत्पादित बासमती चावल को जीआईटैग देने की मांग

सिंह ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि यह ओडिशा के सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक दंपति का वीडियो था, जो देशभर की यात्रा कर रहे हैं और उन्हें यह विचार रोचक लगा, इसलिए उन्होंने इसे साझा कर दिया. वहीं जब दिग्विजय सिंह से किसानों के लिए एक प्रदर्शन की उनकी घोषणा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह राजनीति में हमेशा सक्रिय रहे हैं.

सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखकर मध्यप्रदेश में उत्पादित बासमती चावल को ‘भौगोलिक संकेत’ (जीआईटैग) दिए जाने की मांग की है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांग पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो एक आंदोलन किया जाएगा.

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