जब संसद के बजट सेशन का अंतराल हुआ था तब विषय अलग थे और आज के युद्धकालीन हालातों की वजह से, संकट के इस माहौल में हमारी प्राथमिकता निम्नलिखित विषयों पर होनी चाहिए :
– युद्ध के संदर्भ में देश का पक्ष व राय;
– विदेश नीति के गिरवी रखने का विषय;
– तेल जैसी आपूर्ति पर आत्मनिर्णय की जगह अमेरिकी आदेश का आना;
– हमारी संप्रभुता और आत्मनिर्भरता का प्रश्न;
– युद्ध से प्रभावित क्षेत्रों में फँसे वहाँ कार्यरत भारतीय या पर्यटक बनकर गये भारत के नागरिकों की सुरक्षा व उन्हें सकुशल भारत लाने का सवाल;
– प्रधानमंत्री के साथ गये लेकिन युद्ध शुरू होने के कारण भारत न लौट पाए पत्रकारों व मीडियाकर्मियों को सुरक्षित देश वापस लाने का प्रश्न;
– युद्ध के कारण ज़रूरी आपूर्ति को नियमित व सुनिश्चित करने के साथ ही उनके बढ़ते दामों को नियंत्रित करने का विषय।