हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए तीन प्रत्याशियों के मैदान में उतरने के बाद सियासी दलों की धड़कनें बढ़ गईं हैं. इस बीच भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राज्य में केंद्रीय पर्यवेक्षक की नियुक्ति की है.
पार्टी महासचिव और मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि गुजरात सरकार में उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी राज्यसभा चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक होंगे.
हरियाणा राज्यसभा चुनाव में कौन-कौन है प्रत्याशी?
बता दें हरियाणा से संजय भाटिया (बीजेपी) और कर्मवीर सिंह बौद्ध (कांग्रेस) ने नामांकन दाखिल किया. ये सीटें बीजेपी के राज्यसभा सांसदों किरण चौधरी और राम चन्दर जांगड़ा का कार्यकाल खत्म होने के कारण खाली हुई हैं.बीजेपी नेता सतीश नांदल ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है. अब दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, इसलिए चुनाव कड़ा हो सकता है.
पूर्व सांसद संजय भाटिया ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया. भाटिया को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का करीबी माना जाता है.उनके पास संगठनात्मक राजनीति का लंबा अनुभव है और वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े रहे हैं. वे पहले बीजेपी के राज्य महासचिव भी रह चुके हैं.संजय भाटिया संसद की गृह मामलों की स्थायी समिति, सांसदों के वेतन और भत्तों की संयुक्त समिति और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की परामर्श समिति के सदस्य भी रह चुके हैं.
वहीं, कांग्रेस ने दलित वोट बैंक मजबूत करने के लिए कर्मवीर सिंह बौद्ध को पहली बार चुनाव मैदान में उतारा है. कर्मवीर सिंह बौद्ध राज्य सिविल सचिवालय में प्रशासनिक अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं.
हरियाणा में राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए कितने वोट चाहिए?
इसके अलावा रोहतक के बोहर गांव के रहने वाले सतीश नंदल ने अपना नामांकन दाखिल किया. उनके साथ निर्दलीय विधायक सावित्री जिंदल, देवेंद्र कादयान और राजेश जून मौजूद थे.नामांकन से पहले नंदल ने कहा था कि कुछ विधायकों ने सुझाव दिया था कि एक निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में होना चाहिए, इसलिए उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया.नंदल पहले इंडियन नेशनल लोक दल के नेता रह चुके हैं और वे भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं.
उन्होंने 2009, 2014 और 2019 में गढ़ी सांपला-किलोई विधानसभा सीट से हुड्डा के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत नहीं सके.90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में राज्यसभा सीट जीतने के लिए 31 वोटों की जरूरत होती है. फिलहाल, बीजेपी के पास तीन निर्दलीयों सहित 48 विधायकों का समर्थन है, जबकि कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं.निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नंदल के उतरने से चुनाव और दिलचस्प हो गया है. मतदान 16 मार्च को होगा.