कहते हैं कि अगर हौसले मजबूत हों तो मुश्किल से मुश्किल हालात भी इंसान को रोक नहीं सकते. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के रहने वाले संजय दहरिया की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. 6 साल तक कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ाई लड़ने और बीच में 3 नौकरियां छोड़ने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी. आखिरकार अपनी मेहनत और लगन के दम पर संजय ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में तीसरे प्रयास में 946वीं रैंक हासिल कर ली.
संजय दहरिया महासमुंद जिले के बेलटुकरी गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता किसान हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं रही. ऐसे माहौल में पले-बढ़े संजय ने शुरू से ही पढ़ाई को अपना सहारा बनाया.
उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के ही सरकारी स्कूल से की. लेकिन उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया, जब उन्हें कक्षा 5 में रायपुर के माना स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में प्रवेश मिल गया. यहां से उन्हें बेहतर शिक्षा और आगे बढ़ने का मौका मिला.
बीमारी ने रोका, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी
यूपीएससी की तैयारी के दौरान संजय की जिंदगी में सबसे मुश्किल समय तब आया जब उन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता चला. करीब 6 साल तक उन्होंने इस बीमारी से लंबी लड़ाई लड़ी. इलाज के दौरान कई बार ऐसा लगा कि सब कुछ रुक गया है, लेकिन उन्होंने अपने सपने को कभी नहीं छोड़ा.
बीमारी और इलाज की वजह से उन्हें तीन नौकरियां भी छोड़नी पड़ीं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और धीरे-धीरे फिर से पढ़ाई शुरू की.
तीसरे प्रयास में मिली कामयाबी
संजय दहरिया ने यूपीएससी परीक्षा में लगातार कोशिश जारी रखी. पहले दो प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन तीसरे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई. उन्होंने 946वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि सच्ची लगन और धैर्य से कोई भी मुश्किल पार की जा सकती है.
संजय की सफलता की खबर जैसे ही बेलटुकरी गांव पहुंची, पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई. परिवार के लोग, रिश्तेदार और गांव के लोग उन्हें बधाई देने पहुंच रहे हैं. संजय की इस उपलब्धि ने यह संदेश दिया है कि कठिन परिस्थितियां चाहे जितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर इंसान अपने लक्ष्य पर डटा रहे तो सफलता जरूर मिलती है.