कड़ी मेहनत, धैर्य और मजबूत इरादों से क्या हासिल किया जा सकता है, इसका शानदार उदाहरण पानीपत की बेटी श्रेया गुप्ता ने पेश किया है. उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी में 114वीं रैंक हासिल कर अपने शहर और परिवार का नाम रोशन किया है. उनकी इस सफलता से घर ही नहीं, पूरे इलाके में खुशी का माहौल है. परिवार के लोग गर्व से भरे हुए हैं और आसपास के लोग भी उन्हें बधाई देने पहुंच रहे हैं. यूपीएससी ने सिविल सर्विस परीक्षा 2025 के नतीजे जारी कर दिए हैं.
श्रेया के लिए यह सफलता आसान नहीं थी. इसके पीछे कई सालों की मेहनत और लगातार प्रयास छिपा है. उन्होंने यह परीक्षा दूसरे प्रयास में पास की है. पहले प्रयास में वे केवल दो अंकों से प्रारंभिक परीक्षा पास करने से रह गई थीं. उस समय उन्हें निराशा जरूर हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने अपनी कमियों को समझा और पहले से ज्यादा मेहनत के साथ तैयारी शुरू कर दी. आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और वे देश की टॉप सफल उम्मीदवारों में शामिल हो गईं.
स्कूल से शुरू हुआ सफलता का सफर
श्रेया की शुरुआती पढ़ाई पानीपत के सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल से हुई. बचपन से ही वे पढ़ाई में अच्छी थीं और हमेशा आगे बढ़ने का सपना देखती थीं. स्कूल के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्री राम कॉलेज में दाखिला लिया और वहां से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की.
कॉलेज के अंतिम वर्ष से ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें यूपीएससी की तैयारी करनी है. यही कारण था कि उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ इस परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दी. धीरे-धीरे उन्होंने इस परीक्षा के हर चरण को समझा और उसी के अनुसार अपनी पढ़ाई की योजना बनाई. श्रेया ने ज्यादातर तैयारी घर पर रहकर की. उन्होंने ऑनलाइन कोचिंग की मदद ली और नियमित रूप से पढ़ाई की. इस दौरान उन्होंने समय का पूरा ध्यान रखा और रोजाना कई घंटे पढ़ाई की.
रिजल्ट के समय बढ़ गई थी धड़कन
UPSC का रिजल्ट आने का दिन श्रेया और उनके परिवार के लिए बेहद खास था. जब रिजल्ट घोषित हुआ, उस समय श्रेया अपनी मां के साथ घर पर थीं. उन्होंने जैसे ही रिजल्ट की पीडीएफ खोलकर अपना नाम ढूंढना शुरू किया, पहले कुछ पन्नों में नाम नहीं मिलने पर वे थोड़ी घबरा गईं. उस समय उनके मन में कई तरह के सवाल चल रहे थे. लेकिन जब उन्होंने आगे पन्ने पलटे और 114वीं रैंक पर अपना नाम देखा तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. यह पल उनके लिए बेहद भावुक और यादगार बन गया.
समाज सेवा है सबसे बड़ा लक्ष्य
सफलता मिलने के बाद श्रेया ने कहा कि उनका सबसे बड़ा लक्ष्य समाज की सेवा करना है. वे चाहती हैं कि अपने पद के माध्यम से लोगों की समस्याओं को समझें और उन्हें दूर करने के लिए काम करें. उन्होंने खास तौर पर महिला सशक्तिकरण, महिलाओं की शिक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने की इच्छा जताई है. इसके अलावा वे बच्चों के विकास और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहती हैं. श्रेया ने यह भी कहा कि अगर उन्हें भारतीय विदेश सेवा में जाने का मौका मिलता है तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व की बात होगी.
मां की आंखों में खुशी के आंसू
श्रेया की सफलता से उनकी मां पूनम बेहद भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि इस खुशी को शब्दों में बताना मुश्किल है. उनके अनुसार परिवार काफी समय से रिजल्ट का इंतजार कर रहा था. जब आखिरकार रिजल्ट आया और श्रेया का नाम सूची में दिखा तो पूरा परिवार खुशी से झूम उठा. श्रेया के पिता रमेश गुप्ता ने कहा कि किसी भी पिता के लिए इससे बड़ी खुशी नहीं हो सकती कि उसकी बेटी इतनी बड़ी परीक्षा में सफलता हासिल करे. उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है और वे चाहते हैं कि वह आगे चलकर देश की सेवा करे और समाज के लिए अच्छा काम करे.
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