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UP News: कल्याण सिंह ने बाबरी मस्जिद के बचाव को लेकर पूरी तरह से झूठ बोला, केके वेणुगोपाल का बड़ा खुलासा

अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और सीनियर एडवोकेट के.के. वेणुगोपाल ने बड़ा खुलासा किया है. के.के. वेणुगोपाल ने 1980 के दशक में सिख विरोधी दंगों को भड़काने वाले ‘राजनीतिक आकाओं के आदेश’ पर चर्चा की है. साथ ही उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह द्वारा बाबरी मस्जिद को 1990 के दशक में ध्वस्त नहीं किए जाने के बारे में पूरी तरह से झूठ बोले जाने पर उन्होंने महसूस किए गए विश्वासघात की भावना का जिक्र किया है.

बाबरी विध्वंस को लेकर किया खुलासा

के.के. वेणुगोपाल ने कहा कि उनसे कहा गया था कि 1990 के दौर में बाबरी मस्जिद को नहीं गिराया जाएगा. लेकिन इसके बावजूद मस्जिद को गिरा दिया गया. जिसको लेकर के.के. वेणुगोपाल को धोखे में रखा गया. इस पर उन्होंने खुलासा किया. 

बाबरी मस्जिद विध्वंस पर आधारित ‘रीपिंग द वर्लविंड’ नामक चैप्टर को लेकर के.के. वेणुगोपाल से पूछा गया तो उन्होंने न्यायमूर्ति वेंकटचलैया और अन्य न्यायाधीशों से यह कहने के बारे में बताया है कि मैं शर्म से अपना सिर झुकाता हूं. जिस तेजी से यह विध्वंस हुआ है, भारत सरकार, केंद्र सरकार, ईंटों को वापस लगा दे ताकि अगले दिन मस्जिद पूरी तरह से खड़ी हो सके. उस वक्त वेणुगोपाल सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के वकील थे.

‘कल्याण सिंह ने बोला था झूठ’

के.के.वेणुगोपाल ने कहा कि मुझे लगा कि मैंने जो कहा वो सही था. क्योंकि कल्याण सिंह ने कहा था कि तोड़फोड़ नहीं की जाएगी. वहां एक पुल था और अगर कोई अंदर घुसने की कोशिश करता तो पुलिस उन्हें उसी पुल पर रोक देती. लेकिन कार सेवकों को अंदर जाने से रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया. वे आए और उन्होंने तोड़फोड़ कर दी.

उन्होंने आगे लिखा कि मुझे लगा कि अगर ईंटें उसी रात वापस लगा दी जातीं तो कोई हंगामा नहीं होता. लेकिन अटॉर्नी जनरल मिलन के. बनर्जी ने कहा कि मैं कुछ बहुत ही मजेदार करने की कोशिश कर रहा हूं. मुझे लगता है कि असली वजह ये थी कि कांग्रेस को लगा कि अगर ईंटें वापस लगा दी गईं तो उनका एक वोट बैंक कम हो जाएगा. इसलिए कल्याण सिंह ने मुझसे सरासर झूठ बोला था.

खुद के साथ धोखा होने पर क्या कहा?

अंग्रेजी अखबार द हिन्दू को दिए साक्षात्कार में के.के. वेणुगोपाल से इंटरव्यू में पूछा गया कि क्या आपको धोखे का पता चला? क्या आपको लगा कि कल्याण सिंह ने आपको जो बताया उससे कहीं ज्यादा जानकारी थी और उन्होंने आपसे अदालत को यह आश्वासन दिलवाया कि ऐसा नहीं होगा?

इस पर उन्होंने बताया कि इतना ही नहीं, कल्याण सिंह ने एक हलफनामा भी दाखिल किया था, जिसे मैंने अदालत को सौंप दिया था. अटॉर्नी जनरल मिलन बनर्जी ने एक खुफिया रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कहा गया था कि कार सेवकों को लंबे समय तक प्रशिक्षण दिया गया था. 

रिपोर्ट में कहा गया कि वे आकर तोड़फोड़ करने के लिए तैयार थे. तोड़फोड़ होनी ही थी. लेकिन न्यायमूर्ति वेंकटचलैया को कल्याण सिंह की बात माननी पड़ी कि ऐसा नहीं होगा. और यही नतीजा है. वेणुगोपाल ने कहा कि उस समय कल्याण सिंह अदालत को और मुझे गुमराह करने के लिए तैयार थे.

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