शिवसेना यूबीटी नेता प्रियंका चतुर्वेदी लगातार मोदी सरकार को भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील को लेकर निशाना साधती नजर आई हैं. एक बार फिर उन्होंने सवाल खड़े कर दिए हैं. दरअसल प्रियंका ने अमेरिकी वित्त मंत्री के ट्वीट पर जवाब देते हुए निशाना साधा है. अमेरिकी वित्त मंत्री ने भारत को अपना उपनिवेश बताया है. जिसको लेकर प्रियंका चतुर्वेदी भड़क गई हैं.
अमेरिकी वित्त मंत्री ने किया ये ट्वीट
अमेरिकी वित्त मंत्री ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप के ऊर्जा एजेंडे के परिणामस्वरूप तेल और गैस उत्पादन अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. वैश्विक बाजार में तेल का प्रवाह जारी रखने में सक्षम बनाने के लिए, ट्रेजरी विभाग भारतीय रिफाइनरों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट जारी कर रहा है.
उन्होंने आगे लिखा कि यह जानबूझकर अल्पकालिक उपाय रूसी सरकार को महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ नहीं देगा, क्योंकि यह केवल समुद्र में पहले से ही फंसे तेल से जुड़े लेनदेन को अधिकृत करता है. वित्त मंत्री ने लिखा कि भारत संयुक्त राज्य अमेरिका का एक आवश्यक भागीदार है, और हमें पूरी उम्मीद है कि नई दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगी. यह स्टॉप-गैप उपाय वैश्विक ऊर्जा को बंधक बनाने के ईरान के प्रयास के कारण उत्पन्न दबाव को कम करेगा.
प्रियंका चतुर्वेदी ने किया अमेरिकी वित्त मंत्री पर पलटवार
प्रियंका चतुर्वेदी ने अमेरिकी वित्त मंत्री के ट्वीट पर जवाबा देते हुए लिखा कि हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां हमारी सरकार हमें रणनीतिक स्वायत्तता पर इंस्टाग्राम रील्स दिखाती है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि उसने एक व्यापार समझौते की आड़ में भारत के हितों को दांव पर लगा दिया है, जिसके चलते अब हमें अमेरिका से रूसी तेल खरीदने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ती है.
We live in times where our government gives us Instagram reels on strategic autonomy but the cold hard reality is that it has surrendered India’s interests under the garb of a trade deal where we now need permission to buy Russian oil from America.
Just read the tone and tenor… pic.twitter.com/WIX9PeRjQg— Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) March 6, 2026
उन्होंने आगे लिखा कि अमेरिकी वित्त मंत्री के X के पोस्ट का लहजा और अंदाज़ ही पढ़ लीजिए, इससे पता चलता है कि वे भारत को अपने उपनिवेशों में से एक मानने लगे हैं, न कि एक समान भागीदार. यह वाकई एक बड़ा पतन है.