महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपने 4 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं. पार्टी ने पूर्व मंत्री विनोद तावड़े, आरपीआई (आठवले गुट) के प्रमुख और केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले, हिंगोली के भाजपा नेता रामराव वडकुते और नागपुर की भाजपा नेता माया इवनाते को उम्मीदवार बनाया है. इन नामों के ऐलान के साथ ही एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि पिछले कुछ सालों में भाजपा किस तरह बिहार के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी अपने सहयोगी दलों से आगे निकलकर गठबंधन की सबसे ताकतवर पार्टी बन गई है.
दरअसल, भारतीय राजनीति में बीते एक दशक में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. कभी कई राज्यों में सहयोगी दलों के साथ ‘छोटे भाई’ की भूमिका निभाने वाली भाजपा अब धीरे-धीरे गठबंधन की केंद्रीय शक्ति बनती गई है. महाराष्ट्र और बिहार इसकी सबसे अहम मिसाल हैं, जहां भाजपा ने संगठन, जनाधार और चुनावी रणनीति के दम पर अपनी स्थिति लगातार मजबूत की.
सहयोगी से सत्ता के केंद्र तक
महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय तक शिवसेना और भाजपा का गठबंधन रहा. इस गठबंधन में शिवसेना को हमेशा बड़ा भाई माना जाता था. लेकिन 2014 के बाद भाजपा ने राज्य में अपना जनाधार तेजी से बढ़ाया और विधानसभा में अपनी सीटें भी बढ़ाईं.
2019 के विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना और भाजपा के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद हुआ. इसके बाद शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना ली. हालांकि यह गठबंधन ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया.
2022 में शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे ने पार्टी के कई विधायकों के साथ बगावत कर दी. शिंदे गुट ने भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई और एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने. उस समय भाजपा ने रणनीतिक रूप से समर्थन देकर सत्ता में अहम भूमिका बनाए रखी.
साल 2024 में बनी सबसे बड़ी पार्टी
साल 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 132 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी ताकत दिखाई. वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) को 57 सीटें और एनसीपी को 41 सीटें मिलीं. इन नतीजों ने राज्य में बीजेपी की स्थिति को मजबूत किया.
जनादेश के आधार पर भाजपा ने मुख्यमंत्री पद अपने पास लिया और देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाया. शिंदे गुट को पीछे छोड़ दिया. वहीं एकनाथ शिंदे को उप मुख्यमंत्री का पद मिला. इस तरह महाराष्ट्र में भाजपा सहयोगी से आगे बढ़कर सत्ता की मुख्य धुरी बन गई.
बता दें देश में 16 मार्च को 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने वाले हैं. इसके अलावा इस वर्ष के दौरान 34 और सीटें भी खाली होने जा रही हैं. कुल 245 सदस्यों वाली राज्यसभा में फिलहाल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास 133 सदस्य हैं, जिनमें से 103 सांसद भारतीय जनता पार्टी के हैं.
बिहार में जमाई अपनी पैठ
बिहार में लंबे समय तक जेडीयू नेता नीतीश कुमार गठबंधन का चेहरा रहे और भाजपा सहयोगी की भूमिका में थी. लेकिन समय के साथ भाजपा का जनाधार तेजी से बढ़ा. साल 2025 के विधानसभा चुनाव में राज्य की 243 सीटों में से सबसे ज्यादा बीजेपी ने 89 सीटें जीती. वहीं सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड को 85 सीटें मिली हैं.
महाराष्ट्र और बिहार की राजनीति यह दिखाती है कि भाजपा अब सिर्फ गठबंधन की सहयोगी पार्टी नहीं रह गई है. मजबूत संगठन, बढ़ते जनाधार और आक्रामक चुनावी रणनीति के दम पर पार्टी कई राज्यों में ‘बड़ा भाई’ बनकर उभर रही है. आने वाले समय में यह बदलाव भारतीय राजनीति के गठबंधन समीकरणों को और प्रभावित कर सकता है.