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राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने उद्धव ठाकरे को दिया बड़ा ऑफर, अब फैसले पर टिकी नजर?

महाराष्ट्र की राजनीति में राज्यसभा की एक खाली हो रही सीट को लेकर महाविकास आघाड़ी (MVA) के भीतर हलचल तेज हो गई है. कांग्रेस ने इस सीट पर अपना दावा पेश करते हुए उद्धव ठाकरे से समर्थन मांगा है. यह केवल एक सीट की लड़ाई नहीं है, बल्कि उच्च सदन (राज्यसभा) में कांग्रेस के ‘विपक्ष के नेता’ के पद को बचाने की एक बड़ी राजनीतिक और तकनीकी मजबूरी है.

क्या है कांग्रेस का ‘पावर गेम’ और गणित?

राज्यसभा के नियमों के अनुसार, सदन में ‘विपक्ष के नेता’ का पद बरकरार रखने के लिए किसी भी दल के पास कुल सदस्य संख्या का कम से कम 10% यानी 25 सदस्य होना अनिवार्य है.

  • कुल सदस्य संख्या: 245
  • आवश्यक सदस्य: 25
  • कांग्रेस की मौजूदा स्थिति: 27 सदस्य

दिक्कत यह है कि इस साल राज्यसभा की 72 सीटों पर होने वाले चुनावों के बाद कांग्रेस की संख्या 25 से नीचे गिरने का खतरा मंडरा रहा है. विशेष रूप से जून में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. यदि कांग्रेस अपनी सीटें नहीं बचा पाती, तो वह सदन में विपक्ष के नेता का आधिकारिक दर्जा खो देगी.

महाराष्ट्र की सीट क्यों है ‘लाइफलाइन’?

महाराष्ट्र से कांग्रेस की रजनी पाटिल का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. इसके अलावा अभिषेक मनु सिंघवी, फुलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी जैसे दिग्गजों का कार्यकाल भी इसी साल खत्म हो रहा है. ऐसे में महाराष्ट्र की यह अपेक्षाकृत सुरक्षित सीट कांग्रेस के लिए संजीवनी जैसी है.

उद्धव ठाकरे को ‘एक्सचेंज ऑफर’

कांग्रेस प्रभारी रमेश चेन्निथला ने उद्धव ठाकरे से फोन पर बात कर एक बड़ा प्रस्ताव रखा है. कांग्रेस का कहना है कि अगर उद्धव ठाकरे यह राज्यसभा सीट कांग्रेस को देते हैं, तो बदले में विधान परिषद (MLC) की खाली होने वाली सीट कांग्रेस उन्हें देने को तैयार है. चेन्निथला का तर्क है कि इससे राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया अलायंस मजबूत होगा और मल्लिकार्जुन खड़गे का पद सुरक्षित रहेगा.

चुनौतियों का कैलेंडर

इस साल तीन चरणों में चुनाव होने हैं:

  • 16 मार्च: 37 सीटें
  • 24 जून: 24 सीटें (मल्लिकार्जुन खड़गे का कार्यकाल समाप्त)
  • 11 नवंबर: 11 सीटें

अगर कांग्रेस इन चरणों में अपनी संख्या 25 से ऊपर बनाए रखने में विफल रहती है, तो तकनीकी रूप से उसे राज्यसभा में बड़ा झटका लगेगा. अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या शरद पवार और उद्धव ठाकरे कांग्रेस के इस ‘संकट’ को समझते हुए अपना दावा छोड़ेंगे या गठबंधन में नई रार पैदा होगी.

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