उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद के भंडरा गांव में इन दिनों खुशियों का एक अलग ही माहौल है. वजह है उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग द्वारा चलाया जा रहा मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR), जिसने 28 साल से बिछड़े भाइयों को मिलवा दिया. दरअसल 28 साल पहले रोजगार की तलाश में घर से बिना बताए निकले आत्मदेव मिश्रा अब अपने बड़े भाई संतोष मिश्रा और परिवार के बीच लौट आए हैं. परिवार उन्हें जीवित मानना भी छोड़ चुका था, लेकिन SIR अभियान के दौरान पहचान साबित करने के लिए पुराने दस्तावेजों और गांव के रिकॉर्ड की जरूरत पड़ी, तो आत्मदेव को घर लौटना पड़ा.
रोजगार ढूंढने में छूट गया परिवार
जानकारी के मुताबिक, लगभग 28 वर्ष पूर्व, महोबा तहसील के भंडरा गांव निवासी गुनिया मिश्रा के बेटे आत्मदेव मिश्रा अपने साथी विजय सोनी के साथ रोजगार की तलाश में घर छोड़कर चले गए थे. परिवार ने कई सालों तक खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. बड़ा भाई संतोष मिश्रा और भाभी शांति देवी ने भी बहुत प्रयास किए, मगर आत्मदेव का कोई सुराग नहीं. धीरे-धीरे उम्मीदें धराशायी होती गयीं.
जबकि उधर आत्मदेव राजस्थान के भरतपुर में बंधक बनाकर मजदूरी कर रहे थे. लेकिन अब उन्हें मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए 2003 के रिकॉर्ड और पहचान के प्रमाण की जरूरत पड़ी, तो उनके पास गांव लौटने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था. जैसे ही वे भंडरा पहुंचे, भाई संतोष की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े.
भाई को वापस देख सबके आंसू नहीं रुके
आत्मदेव को देखकर पूरा परिवार भावुक हो गया. भाभी शांति देवी ने माथे पर तिलक लगाकर स्वागत किया, तो गांव वालों ने गुलाल लगाकर गले लगाया. आत्मदेव खुद भावुक होकर बोले कि ऑटो में तो किसी ने पहचाना नहीं, लेकिन घर पहुंचते ही मिला अपनापन ने 28 साल की दूरी मिटा दी.
पड़ोसी चंद्रभान मिश्रा ने कहा कि सरकार का SIR अभियान लोगों की पहचान सुनिश्चित कर रहा है, इसी ने हमारे भाई को वापस लाकर दिया. इस बार होली में अबीर-गुलाल के साथ बिछड़ा भाई भी साथ होगा, घर में दिवाली जैसा माहौल है.
उधर अब विजय सोनी की पत्नी राजकली को भी उम्मीद जगी है कि शायद उनका पति भी SIR के कागजात के बहाने वापस लौट आए.