पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत तत्काल प्रभाव से रद्द किए जाने के बाद नेताओं की प्रतिक्रियाएं लगातार आ रही हैं. राजस्थान के पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने सोनम वांगचुक की रिहाई पर खुशी जताई है. साथ ही उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए सवाल किया कि उनकी हिरासत के 170 दिनों का हिसाब कौन देगा? उन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया था?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक जी की रिहाई का समाचार सुखद है, लेकिन यह पूरा मामला केंद्र की मोदी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है. यह कैसी विडंबना है? जो सोनम वांगचुक कभी पीएम मोदी की नीतियों के समर्थक रहे, जब उन्होंने लद्दाख के हक और पर्यावरण की आवाज उठाई, तो उन्हें NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) जैसी कठोर धाराओं में बांधकर जोधपुर जेल भेज दिया गया.”
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक जी की रिहाई का समाचार सुखद है, परंतु यह पूरा प्रकरण केंद्र की मोदी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह कैसी विडंबना है? जो सोनम वांगचुक कभी प्रधानमंत्री मोदी जी की नीतियों के समर्थक रहे, जब उन्होंने लद्दाख के हक और पर्यावरण की आवाज उठाई,…
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) March 14, 2026
सोनम वांगचुक को गिरफ्तार क्यों किया गया था- गहलोत
उन्होंने आगे लिखा, ”जिस व्यक्ति को कुछ महीने पहले ‘देश की सुरक्षा के लिए खतरा’ बताकर जेल की सलाखों के पीछे डाला गया, उन्हें आज अचानक रिहा करने की बात आई यानी उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले. ऐसे में उनकी हिरासत के 170 दिनों का हिसाब कौन देगा? उन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया था?”
‘क्या राष्ट्रीय सुरक्षा BJP के नफा-नुकसान से तय होगी’
अशोक गहलोत ने सवाल किया, ”क्या राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा अब भाजपा के राजनीतिक नफा-नुकसान से तय होगी? तानाशाही प्रवृत्ति से कानूनों का ऐसा ‘सुविधाजनक इस्तेमाल’ न केवल निंदनीय है, बल्कि हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी गहरा आघात है. देश की जनता इस दोहरे मापदंड को देख रही है.”
वांगचुक को हिरासत में कब लिया गया था?
सोनम वांगचुक की हिरासत और अब उनकी रिहाई को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है. विपक्षी पार्टियों के नेता इसे सरकार की गलती करार दे रहे हैं तो वहीं केंद्र सरकार का मानना है कि ये कदम कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए उठाया गया था. गौरतलब है कि 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसक प्रदर्शन हुए थे. इसी के दो दिन बाद 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था.