Skip to content

हिमाचल: BJP नेता जयराम ठाकुर बोले- ‘सुक्खू सरकार की 3 साल की बजट घोषणाएं अधूरी, कहां गया पैसा’

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का दावा करने वाली सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार के तीन साल बीत जाने के बाद भी पहले बजट की घोषणाएं धरातल पर नहीं उतर पाई हैं. जयराम ठाकुर ने मांग की है कि मुख्यमंत्री अपना चौथा बजट पेश करने से पहले पिछले तीन वर्षों की अधूरी घोषणाओं पर जनता को जवाब दें.

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जिस तरह कांग्रेस झूठी गारंटियां देकर सत्ता में आई थी, उसी तरह अब विधानसभा के भीतर बजट में भी झूठी घोषणाएं कर रही है. उन्होंने मुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि चुनावी रैली के भाषणों और विधानसभा के भीतर की गई घोषणाओं में फर्क होता है. बजट में जिन योजनाओं का प्रावधान होता है, उन्हें पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन मौजूदा सरकार की दर्जनों घोषणाएं आज भी केवल कागजों में धूल फांक रही हैं.

कागजों में दफन हैं ये प्रमुख घोषणाएं

जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार की कई अधूरी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 20,000 मेधावी छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी के लिए ₹25,000 की सब्सिडी देने की घोषणा का अब कोई जिक्र नहीं होता. 6 ग्रीन कॉरिडोर बनाने की बात कहने वाली सरकार ने उल्टे इलेक्ट्रिक चार्जिंग पर ₹6 प्रति यूनिट का ‘एनवायरमेंट सैस’ लगा दिया है.  हर विधानसभा में ‘आदर्श स्वास्थ्य संस्थान’ खोलने की बात हवा-हवाई साबित हुई. चंबा, नाहन और हमीरपुर में पैट (PET) स्कैन मशीन लगाने की घोषणा भी फाइलों में दब गई है. किसानों, बागवानों, खिलाड़ियों, महिलाओं, जनजातीय क्षेत्रों और युवाओं के रोजगार से जुड़ी तमाम घोषणाएं भी सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं.

कहां गया 2.2 लाख करोड़ का बजट और 45 हजार करोड़ का कर्ज?

पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि सुक्खू सरकार ने पहले वर्ष में: 63,712 करोड़ रुपये, दूसरे वर्ष में: 75,496 करोड़ रुपये, तीसरे वर्ष में, 58,343 करोड़ रुपये का बजट पेश किया.

तीन वर्षों में कुल मिलाकर लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया और इसके अतिरिक्त 45,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज भी लिया गया. जयराम ठाकुर ने पूछा कि इतना भारी-भरकम बजट और कर्ज लेने के बावजूद जब योजनाएं शुरू ही नहीं हुईं, तो बजट का वह पैसा आखिर गया कहां? उन्होंने कहा कि यह सरकार की नीयत और कार्यप्रणाली पर बहुत बड़े सवाल खड़े करता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *