हिमाचल प्रदेश विधानसभा का दो चरणों में चला बहुचर्चित बजट सत्र गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया. 16 दिनों तक चले इस सत्र में जहां एक ओर 103 प्रतिशत उत्पादकता के साथ रिकॉर्ड कामकाज हुआ, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त सियासी घमासान भी देखने को मिला.
सत्र के दूसरे चरण में 21 मार्च को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपना अब तक का सबसे लंबा बजट भाषण पढ़ा. यह सत्र कई ऐतिहासिक और कड़े फैसलों का गवाह बना. प्रदेश की माली हालत को सुधारने के लिए माननीयों (नेताओं) और बड़े अफसरों के वेतन में 6 माह के लिए 3 से 50 फीसदी तक की कटौती का बड़ा निर्णय लिया गया.
वहीं, जनहित से जुड़े मुद्दों पर सदन खूब तपा. विपक्ष के भारी हंगामे और वाकआउट के बावजूद सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 5 रुपये तक की बढ़ोतरी, एंट्री टैक्स में इजाफा और दल-बदल विरोधी कानून को सख्त करने वाले संशोधन विधेयक पारित करा लिए. इसके अलावा पंचायती राज चुनावों और आरडीजी (RDG- रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट) को लेकर भी सदन में तीखी बहस हुई.
90 घंटे चला सदन, 103% रहा कामकाज
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सत्र की सफलता का ब्योरा देते हुए बताया कि इन 16 बैठकों में कुल 90 घंटे तक कार्यवाही चली और उत्पादकता 103% रही. इस दौरान विधायकों ने 471 तारांकित और 146 अतारांकित सवाल पूछे. नियम 102 के तहत RDG पर सरकारी संकल्प लाया गया. शून्यकाल में 94 अहम विषय उठाए गए और 9 सरकारी विधेयकों को सदन में पुनः स्थापित किया गया.
‘कोई आर्थिक संकट नहीं, हम आत्मनिर्भर बन रहे हैं’
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि RDG बंद होने से बजट का आकार जरूर कम हुआ है, लेकिन विकास की रफ्तार नहीं रुकेगी. उन्होंने दो टूक कहा कि प्रदेश में कोई गहरा आर्थिक संकट नहीं है, बल्कि राज्य सीमित संसाधनों के साथ ‘आत्मनिर्भरता’ की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है.
‘व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर व्यवस्था तार-तार’
सत्र के समापन पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा, “हिमाचल की आर्थिक स्थिति के लिए पिछली सरकारों पर ठीकरा फोड़ना गलत है. मुख्यमंत्री को अपने सामने सिर्फ जयराम ठाकुर नजर आते हैं.” जयराम ठाकुर ने सीएम द्वारा पूर्व की जनहित योजनाओं के लिए ‘संपदा लुटाने’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे कार्यवाही से हटाने की मांग की.
विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने अब तक का सबसे ज्यादा (16 फीसदी) कर्ज लिया है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के दौर में पूरी व्यवस्था तार-तार हो गई है. मुख्यमंत्री को विपक्ष की आवाज दबाने के बजाय आईएएस (IAS) अफसरों की आपसी लड़ाई सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए.