हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को होने जा रहे चुनावों में मुकाबला दिलचस्प होने जा रहा है, क्योंकि निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल ने नामांकन वापिस नहीं लिया है. आज नामांकन वापसी का अंतिम दिन था, मगर बीजेपी प्रत्याशी संजय भाटिया और कांग्रेस प्रत्याशी करमवीर बौद्ध के अलावा निर्दलीय नामांकन भरने वाले बीजेपी के नेता सतीश नांदल मैदान में डटे हुए हैं.
राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 31 विधायकों का वोट जरूरी
बीजेपी के राजसभा सांसदों किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल पूरा हो रहा है जिसके चलते ये चुनाव हो रहे हैं. राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 31 विधायकों के वोट की जरूरत है. राज्य में विधानसभा की 90 सीटें हैं जिनमें से बीजेपी के 48 विधायक हैं, जबकि बीजेपी को तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी प्राप्त है. कांग्रेस के 37 विधायक हैं और दो विधायक इंडियन नेशनल लोक दल के हैं.
विधायकों में सेंध लगाएंगे नांदल!
हालांकि, विधायकों की संख्या के हिसाब से बीजेपी की एक सीट पर जीत सुनिश्चित है और कांग्रेस के लिए भी दूसरी सीट जीतना आसान लग रहा है. मगर बीजेपी नेता नांदल के मैदान में डटे रहने से ये साफ हो गया है कि बीजेपी-कांग्रेस विधायकों में सेंध लगाकर नांदल को विजयी बनाने की पूरी कोशिश करेगी. ऐसा पहले भी हुआ है कि संख्याबल होने के बावजूद कांग्रेस राज्यसभा सीट जीतने में नाकाम रही थी.
2016 बीजेपी और बीजेपी समर्थित प्रत्याशी ने दर्ज की थी जीत
जून 2016 में दो राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में एक सीट बीजेपी के बीरेंद्र चौधरी जीते थे, जबकि दूसरी सीट भी बीजेपी समर्थित व्यवसाई सुभाष चंद्रा आजाद प्रत्याशी के तौर पर जीत गए थे. उस वक्त कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल ने RK आनंद को समर्थन दिया था और दोनों के पास 35 विधायक थे. मगर कांग्रेस के 14 विधायकों के वोट अवैध करार दिए गए थे जबकि एक INLD विधायक ने भी सुभाष चंद्रा के पक्ष में मतदान किया था.
कांग्रेस प्रत्याशी अजय माकन को करना पड़ा था हार का सामना
जून 2022 में भी दो राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अजय माकन को हार का सामना कर पड़ा था. कांग्रेस के उस वक्त 31 विधायक थे, मगर इसके बावजूद बीजेपी और जन नायक जनता पार्टी समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी कार्तिकेय शर्मा ने माकन को हराकर दूसरी सीट भी जीत ली थी. एक सीट पर बीजेपी के कृष्ण लाल पंवार जीते थे.