नई दिल्ली और सऊदी अरब के बीच 15 दिनों के अंतराल के बाद हवाई उड़ानें शुक्रवार (13 मार्च) को फिर से शुरू हो गई हैं. इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में ‘हज-2026’ की तैयारियां भी जोरों पर आ गई हैं. इस साल केंद्र शासित प्रदेश से लगभग 4,717 अकीदतमंद (तीर्थयात्री) मुकद्दस हज यात्रा पर जाएंगे. खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध और हवाई क्षेत्र को लेकर अनिश्चितताओं के बावजूद, प्रशासन ने यात्रा को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए कमर कस ली है.
उड़ानों का शेडयूल: 18 से 28 अप्रैल तक विशेष व्यवस्था
श्रीनगर हज कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं. जम्मू-कश्मीर से हज यात्रियों का पहला जत्था 18 अप्रैल को श्रीनगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से मक्का और मदीना के लिए रवाना होगा. यह विशेष हज उड़ानें 18 अप्रैल से 28 अप्रैल के बीच संचालित की जाएंगी. भीड़ और अव्यवस्था से बचने के लिए, तीर्थयात्री 10 दिनों की अवधि में अलग-अलग जत्थों में यात्रा करेंगे और हर उड़ान में यात्रियों की संख्या पूर्व-निर्धारित होगी.
इस साल के नए नियम: खुद खाना पकाने पर सख्त रोक
हज यात्रा के दौरान सुरक्षा, स्वच्छता और बेहतर सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए इस बार कुछ अहम बदलाव किए गए हैं. तीर्थयात्रियों के लिए अपने प्रवास के दौरान खुद खाना पकाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है. भोजन की व्यवस्था अब निर्धारित कैटरिंग सेवाओं के माध्यम से ही की जाएगी. सऊदी अरब में पुरुष और महिला तीर्थयात्रियों के रुकने के लिए अलग-अलग आवास (Accommodation) की विशेष व्यवस्था की गई है.
मेडिकल चेकअप और ओरिएंटेशन प्रोग्राम
जम्मू-कश्मीर हज समिति द्वारा यात्रा से पहले यात्रियों के लिए विशेष ‘ओरिएंटेशन’ (मार्गदर्शन) और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इन कार्यक्रमों में यात्रियों को हज के अनुष्ठानों, यात्रा प्रक्रियाओं और स्वास्थ्य दिशानिर्देशों की विस्तार से जानकारी दी जाएगी. प्रशासन ने सभी यात्रियों को सख्त सलाह दी है कि वे प्रस्थान से पहले अपनी अनिवार्य मेडिकल जांच और दस्तावेज़ीकरण (Documentation) का काम समय रहते पूरा कर लें.
युद्ध का साया और हवाई क्षेत्र की चुनौतियां
ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट के हवाई क्षेत्र (Airspace) के बंद होने और यात्रा को लेकर कुछ अनिश्चितताएं बनी हुई हैं. हालांकि, अधिकारियों ने पूरी उम्मीद जताई है कि तय कार्यक्रम के अनुसार 18 अप्रैल को पहले जत्थे की रवानगी के साथ ही हज यात्रा बिना किसी बड़ी बाधा के सुचारू रूप से आगे बढ़ेगी.