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संभल: मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, डीएम-एसपी को फटकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक सख्त टिप्पणी के बाद संभल की गोसिया मस्जिद का मामला चर्चा में आ गया है. अदालत ने मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने के फैसले पर प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए साफ कहा कि जिला प्रशासन को ऐसा आदेश देने का अधिकार नहीं है. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि अगर अधिकारी कानून व्यवस्था संभालने में सक्षम नहीं हैं तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए या स्थानांतरण करा लेना चाहिए.

साथ ही इस मामले में जिला प्रशासन की भूमिका और फैसले पर सवाल उठने लगे हैं. वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि नमाज अदा करने को लेकर किसी तरह की रोक-टोक नहीं होनी चाहिए. इस पूरे विवाद के बाद अब गोसिया मस्जिद और प्रशासनिक निर्णय दोनों चर्चा के केंद्र में आ गए हैं.

16 मार्च को इस मामले की होगी अगली सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने कहा कि यह राज्य का कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करें कि हर समुदाय निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा कर सके. अगर वह निजी संपत्ति है, तो राज्य से किसी इजाजत की जरूरत नहीं. कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि राज्य का दखल सिर्फ वहीं जरूरी है, जहां प्रार्थना या धार्मिक काम सार्वजनिक भूमि पर आयोजित किए जाने हों. संभल में याचिकाकर्ता मुनाजिर खान ने बताया कि पिछले साल फरवरी महीने में हयातनगर थाने से पुलिसवाले आए थे.

उन्होंने कहा कि सिर्फ 20 लोग ही मस्जिद में नमाज पढ़ सकते हैं. एक बार में 5-6 लोग ही नमाज अदा करें. इसके बाद मुनाजिर ने 18 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट में याचिका दायर की. 27 फरवरी को पहली सुनवाई हुई और शनिवार 14 मार्च को आदेश हाईकोर्ट की साइट पर अपलोड हुआ. अब 16 मार्च को इस मामले की अगली सुनवाई होगी.

मस्जिद में नमाज अदा करने से रोका जा रहा- याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि रमजान के दौरान मस्जिद में नमाज अदा करने से रोका जा रहा. रमजान चल रहा है, ऐसे में परिसर के भीतर नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ सकते हैं. वहीं, सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नमाजियों की संख्या सीमित करने का आदेश दिया था. दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने सरकार के वकील के तर्क को खारिज कर दिया. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आपने अब तक मस्जिद या नमाज की जगह की कोई तस्वीर कोर्ट में दाखिल नहीं की है. इस पर याचिकाकर्ता ने समय मांगा.

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संभल एसपी और डीएम को कोर्ट ने लगाई फटकार

इसके बाद कोर्ट ने उन्हें नमाज की जगह की तस्वीरें और राजस्व रिकॉर्ड दाखिल करने के लिए अनुमति दे दी. अब वह इसे 16 मार्च से पहले सब्मिट करेंगे. संभल के हयातनगर थाना इलाके धनेटा सोतीपुरा गांव में लगभग 30 प्रतिशत यानी 400 से 500 मुस्लिम मतदाता रहते हैं जबकि 70 प्रतिशत आबादी गांव में हिन्दू समुदाय की है. गांव में कोई अन्य मस्जिद नहीं है. 1999 में यहां 450 वर्गफीट में छिद्दा खान नाम के व्यक्ति ने हाईकोर्ट से इजाजत लेकर ये घोसिया नाम की मस्जिद बनवाई थी. तब से गांव के लोग यहां नमाज पढ़ते आ रहे थे. लेकिन संभल पुलिस प्रशासन ने नमाजियों की संख्या 20 से अधिक न हो और सिर्फ छिद्दा खान के परिवार के लोग ही नमाज पढ़ सकते हैं और कोई नमाज यहां मस्जिद में नहीं पढ़ सकता ऐसी पाबंदी लगा दी थी जिस पर हाईकोर्ट ने संभल के एसपी और डीएम को फटकार लगाई है. जिसके बाद से ये गोसिया मस्जिद चर्चा में आ गयी है. गांव के लोगों का कहना है कि हम हाईकोर्ट के फैसले से खुश है और अब गांव के लोगों का कहना है कि प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश का पालन करें और किसी को नमाज पढ़ने से न रोका जाए.

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