मुंबई सेशंस कोर्ट ने 2016 के चर्चित फर्जी एनकाउंटर केस में सभी 8 आरोपियों को बरी कर दिया है. इन आरोपियों में संदीप गाडोली के कथित एनकाउंटर में शामिल हरियाणा पुलिस के 5 पुलिसकर्मी भी शामिल थे. सभी पर हत्या और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप लगे थे.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2016 का है, जब हरियाणा के गुरुग्राम का कुख्यात गैंगस्टर संदीप गाडोली मुंबई आया हुआ था. 7 फरवरी 2016 को मुंबई के एक होटल में हरियाणा पुलिस की टीम ने उसे गोली मार दी. पुलिस का दावा था कि गाडोली पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे और वह मुठभेड़ के दौरान मारा गया. लेकिन इस एनकाउंटर पर शुरू से ही सवाल उठने लगे. आरोप लगा कि यह असली मुठभेड़ नहीं बल्कि पहले से रची गई साजिश थी. कहा गया कि गाडोली को होटल में बुलाया गया और फिर प्लानिंग के तहत उसकी हत्या कर दी गई.
दिव्या पाहुजा का रोल
इस पूरे मामले में दिव्या पाहुजा नाम की महिला का नाम भी सामने आया था, जो उस समय गाडोली के साथ होटल में मौजूद थी. जांच में आरोप लगा कि दिव्या ने ही गाडोली को मुंबई बुलाने और उसे होटल में रुकवाने में अहम भूमिका निभाई थी. पुलिस के मुताबिक, दिव्या पाहुजा और गाडोली के बीच करीबी संबंध थे, और उसी भरोसे का फायदा उठाकर उसे एक जाल में फंसाया गया. इसी वजह से उसे इस केस में साजिश का हिस्सा माना गया और आरोपी बनाया गया.
बाद में दिव्या पाहुजा का मर्डर
इस केस से जुड़ी एक और सनसनीखेज कड़ी बाद में सामने आई, जब दिव्या पाहुजा की हत्या कर दी गई. साल 2024 में गुरुग्राम के एक होटल में उसकी लाश बरामद हुई थी. जांच में सामने आया कि उसकी हत्या गोली मारकर की गई और बाद में शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की गई. इस मर्डर केस ने एक बार फिर गाडोली एनकाउंटर केस को सुर्खियों में ला दिया, क्योंकि दिव्या इस पूरे मामले की एक अहम कड़ी मानी जाती थी.
मुंबई कोर्ट का फैसला
करीब 10 साल बाद आए इस फैसले में मुंबई सेशंस कोर्ट ने सभी 8 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया.