पश्चिम बंगाल दौरे पर गईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के स्वागत और सम्मान में उचित प्रोटोकॉल का पालन न होने के मामले में सियासत तेज हो गई है. शिवसेना उद्धव बाला साहेब ठाकरे के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए केंद्र सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए.
राउत ने कहा ‘अगर कोई कहता है कि राष्ट्रपति का अपमान हुआ है तो यह सरकार भी बार-बार उनका अपमान कर रही है. हमें गर्व है कि एक आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनीं, लेकिन उनके कार्यकाल में मणिपुर में आदिवासी महिलाओं को जिंदा जला दिया गया और इस पर राष्ट्रपति की कोई टिप्पणी नहीं आई. झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे आदिवासी राज्यों में जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के मूल अधिकारों पर सरकार और उद्योगपतियों की ओर से हमला हो रहा है, लेकिन इस मुद्दे पर भी हमने अपनी आदिवासी महिला राष्ट्रपति की कोई प्रतिक्रिया नहीं सुनी.
‘राष्ट्रपति का सम्मान होना चाहिए, लेकिन…’
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का सम्मान होना चाहिए, लेकिन अगर राष्ट्रपति का किसी राज्य में दौरा होता है तो उस राज्य की सरकार को भी विश्वास में लेना चाहिए. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी जीत रही हैं और बीजेपी के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए वे राष्ट्रपति का नया मुद्दा लेकर आए हैं. राष्ट्रपति को राजनीति में घसीटना ही राष्ट्रपति का अपमान है.’
इसके साथ ही राउत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर कहा, ‘सत्ताधारी दल को सोचना चाहिए कि ऐसी स्थिति क्यों आई. 2014 में नरेंद्र मोदी के शासन की शुरुआत के बाद से ही वे किसी भी सदन-लोकसभा या राज्यसभा-में विपक्ष को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं. सरकार सदन चलाने में असफल है, विपक्ष के नेता का अपमान किया जाता है और माइक्रोफोन तक बंद कर दिए जाते हैं.’
पश्चिम एशिया की स्थिति पर संसद में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान को लेकर राउत ने कहा, ‘जब हमारे विदेश मंत्री बयान देंगे, तब हम उस पर उनसे जरूर कुछ सवाल पूछेंगे.’