बस्तर में शांति और विकास की दिशा में आज एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. नक्सली कमांडर और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के सदस्य पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ बस्तर पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है.
इस मौके पर प्रदेश के डीजीपी अरुण सिंह देव गौतम, एडीजी (नक्सल) विवेकानंद सिन्हा और बस्तर आईजी सुंदरराज पी. मौजूद रहे. आत्मसमर्पण के दौरान आदिवासी समाज के प्रमुखों ने मुख्यधारा में लौटे इन पूर्व नक्सलियों को संविधान की प्रति और फूल भेंट कर उनका मुख्यधारा में स्वागत किया.
गृहमंत्री ने दिया 2 सालों का आंकड़ा
इस समर्पण समारोह में पहुँचे प्रदेश के गृहमंत्री और डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि अब बस्तर में DKSZC स्तर का एक भी माओवादी सक्रिय नहीं बचा है और गिनती के माओवादी ही शेष रह गए हैं. उनके लिए भी पुनर्वास की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने बताया कि पिछले 2 वर्षों में 3,000 से अधिक माओवादियों ने सरेंडर किया है और 2,000 से अधिक नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है.
इसके अलावा सुरक्षा बलों ने अलग-अलग मुठभेड़ों में पिछले 2 सालों में 525 माओवादियों को मार गिराया है. नक्सलवाद के खात्मे में इसरो (ISRO) की सैटेलाइट तकनीक ने फोर्स की बड़ी मदद की है. गृहमंत्री ने घोषणा की कि जैसे-जैसे शांति बहाल हो रही है, बस्तर के 400 सुरक्षा कैंपों को हटाकर उन्हें लघु वनोपज केंद्रों में तब्दील किया जाएगा. इससे स्थानीय आदिवासियों को रोजगार मिलेगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. अब छत्तीसगढ़ के अन्य नक्सल प्रभावित जिले भी पूरी तरह नक्सल मुक्त होने की राह पर हैं.
साउथ बस्तर में अब लगभग 40 नक्सली शेष
बस्तर के आईजी सुंदरराज पी. ने कहा कि दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के DKSZC मेंबर और साउथ सब-जोन ब्यूरो के इंचार्ज पापाराव और उनके साथ तीन DVCM प्रकाश माड़वी, अनिल ताती और विलास पोयाम समेत 18 माओवादी कैडर, जिसमें 7 महिला माओवादी कैडर भी हैं, कुल 18 माओवादी कैडर अपने साथ 12 लाख नगद राशि, 8 AK-47, SLR, इंसास 303, BGL लॉन्चर एवं अन्य हथियार और सामग्री के साथ हिंसा त्याग कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए हैं.
उनका शासन की ओर से स्वागत किया गया. आईजी ने कहा कि दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी इलाके में लगभग सीनियर लीडरशिप समाप्त हो चुकी है. केवल शेष एक ही रह गए थे पापाराव. आज उनके पुनर्वास के पश्चात टॉप लेवल की लीडरशिप बस्तर के इलाके में शून्य हो चुकी है. शेष अन्य लगभग 40 से 50 की संख्या में गिने-चुने माओवादी कैडर हैं, जो बस्तर संभाग के अंतर्गत अलग-अलग जिलों में छोटी-छोटी टोलियों में हैं. उन्हें भी लगातार तय समय सीमा 31 मार्च से पहले आत्मसमर्पण करने की अपील की जा रही है.

बस्तर को किया जाएगा IED मुक्त
वहीं प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने कहा कि यह बस्तर पुलिस के लिए काफी बड़ी उपलब्धि है. देश के गृहमंत्री अमित शाह ने जो तय समय सीमा जारी की है, उससे पहले कई बड़े माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है. डीजीपी ने कहा कि बस्तर से माओवाद खत्म करने में पैरामिलिट्री फोर्स और स्थानीय पुलिस बल का सबसे बड़ा योगदान है.
उन्होंने कहा कि बस्तर के नक्सल मुक्त होने के बाद अंदरूनी इलाकों में स्थापित पैरामिलिट्री फोर्स के सुरक्षा कैंपों में छत्तीसगढ़ की पुलिस रहेगी और उन इलाकों की सुरक्षा करेगी. इसके अलावा उन्होंने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए IED पुलिस के लिए बड़ी चुनौती हैं. जितने भी बड़े नक्सली लीडर और छोटे कैडर के नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, उनके निशानदेही पर एक्सप्लोसिव IED सर्च कर बस्तर के सभी गांवों को IED मुक्त किया जाएगा.
माओवादी संगठन में टॉप लीडरशिप हुई शून्य
DKSZC मेंबर पापा राव का सरेंडर बस्तर में दशकों से चले आ रहे नक्सलवाद के ‘अंतिम अध्याय’ की शुरुआत है. DKSZC सदस्य पापा राव और तीन अन्य डिवीजनल कमेटी मेंबर्स (DVCM) के आत्मसमर्पण के साथ ही बस्तर में माओवादियों की ‘टॉप लेवल लीडरशिप’ अब शून्य हो गई है.