राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बीते दिनों पश्चिम बंगाल दौरे पर थी, इस दौरान राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उन्हें रिसीव करने नहीं पहुंची थी. इस मामले पर सियासी बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है, ममता सरकार के खराब आचरण पर राज्यसभा में बीजेपी सांसद बाबूराम निषाद ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर निशाना साधा है.
सदन में भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद ने अपने उद्बोधन की शुरुआत में कहा कि, “आज मैं एक महत्वपूर्ण विषय पर सभापति और सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा…जो किसी दल या राजनीति से ऊपर है. यह विषय भारत के राष्ट्रपति की गरिमा और हमारे संविधान की आत्मा से संबंधित है.”
‘राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल का उल्लंघन संवैधानिक अपराध’
राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद ने कहा कि, “पश्चिम बंगाल में हाल ही में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन के दौरान जो प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है, वह केवल चूक नहीं बल्कि एक संवैधानिक अपराध है.” उन्होंने कहा कि, “जब एक राज्य सरकार जानबूझकर देश के सर्वोच्च पद की अवहेलना करती है तो वह भूल जाती है कि संविधान की शपथ लेकर सत्ता में बैठी है.”
‘संविधान के अनुच्छेद 52 से 62 तक राष्ट्रपति पद की व्याख्या’
राज्यसभा सांसद ने कहा कि, संविधान के अनुच्छेद 52 से 62 तक राष्ट्रपति पद की व्याख्या की गई है, राष्ट्रपति भारतीय गणराज्य के प्रतीक हैं. पश्चिम बंगाल सरकार का यह कृत्य अनुच्छेत 256 और 257 का उल्लंघन है. यह अनुच्छेद स्पष्ट करते हैं कि राज्य सरकार केंद्र के निर्देशों पर संवैधानिक प्रमुखों के प्रोटोकॉल पालन करने के लिए बाध्य हैं. उन्होंने मांग की है कि संवैधानिक उत्तरदायित्व अधिनियम जैसा एक कानून बनाया जाना चाहिए.
‘अनुच्छेद 356 के तहत शुरू की जानी चाहिए कार्यवाही की प्रक्रिया’
राज्यसभा सांसद ने कहा कि, “यदि कोई राज्य सरकार जानबूझकर राष्ट्रपति या संवैधानिक प्रमुख के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करती है तो उसे संवैधानिक तंत्र की विफलता मानकर अनुच्छेद 356 के तहत कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए.” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं का संबंधित राज्य के विवेकाधीन अनुधान में कटौती का प्रावधान हो. प्रोटोकॉल के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और मंत्रियों पर आपराधिक मुकदमा चलना चाहिये.
उन्होंने अंत में कहा कि आज पश्चिम बंगाल की इस गुस्ताखी को माफ किया गया तो अन्य राज्य की सरकारें भी इसी राह पर चलेंगी. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि संविधान सर्वोपरी है.