मध्य प्रदेश के रायसेन स्थित ऐतिहासिक किले की प्राचीर से रमजान के महीने में रोजा इफ्तार और सहरी के वक्त तोप दागे जाने की 70 साल पुरानी परंपरा अब बड़े विवाद में तब्दील हो गई है. ईरान के समर्थन में नारेबाजी वाले एक वायरल वीडियो के बाद हिंदू संगठनों के विरोध पर अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में कड़ा संज्ञान लिया है.
आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो के नेतृत्व में एक टीम ने रायसेन किले पर पहुंचकर मामले की गहन जांच की है. जांच के दौरान कई चौंकाने वाले कानूनी पेंच सामने आए हैं, जिसके बाद आयोग ने तोप के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के सख्त निर्देश दिए हैं.
कलेक्टर और SDM पर होगी कार्रवाई की चेतावनी
किले का पैदल मुआयना करने के बाद NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि कलेक्टर को इस तोप को चलाने के लिए लाइसेंस देने का कोई कानूनी अधिकार ही नहीं है. उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग (ASI) और वन विभाग की ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) के बिना ही जिला प्रशासन द्वारा तोप चलाने की अनुमति कैसे और क्यों दी जा रही थी?
बारूद और आतंकी कनेक्शन की आशंका
कानूनगो ने इस बात की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है कि तोप में भरने के लिए कौन सा बारूद (या RDX) इस्तेमाल हो रहा है और वह कहां से आता है? उन्होंने इस बारूद के आतंकी गतिविधियों में प्रयोग होने की शंका भी जताई है.
अधिकारियों को अल्टीमेटम
आयोग ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि अब यदि किले से तोप चलती है, तो सीधे कलेक्टर और SDM के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
जानमाल का खतरा: रिहायशी इलाके पर चलती है तोप
आयोग ने तोप के संचालन को सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद खतरनाक बताया है. जिस दिशा में तोप का मुंह है और जहां इसे चलाया जाता है, उसके ठीक नीचे घना रिहायशी इलाका है. इससे न केवल स्थानीय निवासियों की जान को बड़ा खतरा है, बल्कि तोप चलाने वाले व्यक्तियों के साथ भी कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है.
कैसे शुरू हुआ यह पूरा विवाद?
दरअसल, रायसेन में रमजान के दौरान तोप चलाने की यह परंपरा लगभग 70 साल पुरानी है. लेकिन विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ दिनों पहले भोपाल से रायसेन पहुंचे तीन युवकों ने तोप चलाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर डाला. आरोप है कि इस वीडियो को एडिट करके उसमें ‘ईरान के समर्थन’ में भड़काऊ नारेबाजी जोड़ी गई थी.
वीडियो वायरल होने के बाद मामला गरमा गया और जिले के 11 हिंदूवादी संगठनों ने एकजुट होकर तोप बंद कराने के लिए रायसेन कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा. इसके बाद मानवाधिकार आयोग में भी इसकी शिकायत की गई, जिसके बाद दिल्ली से आयोग की टीम को रायसेन में उतरना पड़ा.