रामनगरी अयोध्या में आस्था और कला का अद्भुत संगम देखने को मिला है. उड़ीसा से आए एक भक्त कलाकार ने धान के दानों से भगवान श्रीराम के दरबार की अनोखी कृति तैयार कर रामकथा संग्रहालय को भेंट की है. यह कृति न सिर्फ अपनी सुंदरता बल्कि अपनी अनूठी तकनीक के लिए भी चर्चा में है.
दरअसर, उड़ीसा के कलाकार लक्ष्मी नारायण बक्सी द्वारा निर्मित इस विशेष कृति में करीब एक लाख इक्कीस हजार धान के दानों का उपयोग किया गया है. धान के साथ-साथ इसमें महीन रेशमी धागों का भी बेहद बारीकी से प्रयोग किया गया है, जो इसे और भी आकर्षक बनाता है.
राम, लक्ष्मण, माता सीता और हनुमान की उकेरी गई प्रतिमा
इस कृति को राम दरबार का स्वरूप दिया गया है, जिसमें भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता जानकी और भक्त हनुमान की सुंदर प्रतिमाएं उकेरी गई हैं. दूर से देखने पर जहां चेहरों की बनावट कपड़े जैसी प्रतीत होती है, वहीं पास से देखने पर रेशम के बारीक धागों की अद्भुत कलाकारी नजर आती है.
नीले रंग में दर्शाया गया भगवान श्रीराम का मुख
कृति में भगवान श्रीराम का मुख नीले रंग में दर्शाया गया है, वहीं लक्ष्मण जी के हाथों में धनुष-बाण उनकी सतर्कता और सेवा भाव को दर्शाते हैं. माता सीता के हाथों में कमल पुष्प उनकी गरिमा और शांति का प्रतीक है. वहीं हनुमान जी को भक्तिभाव में प्रभु के सामने गदा के साथ नतमस्तक मुद्रा में दर्शाया गया है, जो समर्पण की भावना को जीवंत करता है.
अनोखी कृति को संग्रहालय ने किया स्वीकार
अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के संयोजक संजीव कुमार ने बताया कि इस अनोखी कृति को संग्रहालय द्वारा स्वीकार कर लिया गया है. हालांकि इसका औपचारिक पंजीकरण अभी बाकी है, लेकिन गैलरी में इसे उचित स्थान देने के लिए डिजाइनरों से विचार-विमर्श किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु इस अद्भुत कला का दर्शन कर सकें.
करीब में तैयार की गई कृति
इस कृति को तैयार करना बेहद जटिल प्रक्रिया है, पहले धान के दानों को संयोजित किया जाता है, फिर उन्हें फ्रेम में स्थापित कर कलाकार की कल्पना के अनुसार आकार दिया जाता है. इस पूरी कृति को बनाने में कलाकार को करीब आठ महीने का समय लगा. अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह कृति अब आस्था के साथ-साथ कला का भी एक विशेष आकर्षण बनने जा रही है.