राजस्थान में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बेहद सख्त और अहम फैसला सुनाया है. अदालत के आदेश के मुताबिक, अब नेशनल हाईवे (NH) और स्टेट हाईवे (SH) के केंद्र (बीच) से दोनों तरफ 75 मीटर के दायरे में संचालित सभी अवैध होटलों, ढाबों और रेस्टोरेंटों पर बुलडोजर की कार्रवाई की जाएगी. कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद प्रशासन अब जल्द ही इन निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए बड़े एक्शन की तैयारी कर रहा है.
इंसानी जान की कीमत निर्माण से ज्यादा
यह महत्वपूर्ण आदेश ‘हिम्मत सिंह गहलोत बनाम राज्य सरकार’ मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और इंसानी जान की कीमत किसी भी अवैध निर्माण से कहीं ज्यादा है. कोर्ट के आदेशानुसार, हाईवे के केंद्र से 75 मीटर के दायरे में आने वाले सभी निर्माणों को अवैध माना जाएगा और स्थानीय प्रशासन को इन्हें हटाने के निर्देश दिए गए हैं.
परमिशन होने पर भी माने जाएंगे अवैध
इस फैसले की सबसे बड़ी बात यह है कि यदि किसी हाईवे किनारे बने निर्माण को स्थानीय प्रशासन की ओर से पहले से अनुमति (Permission) मिली हुई है, लेकिन वह हाईवे के केंद्र से 75 मीटर की सीमा के भीतर आता है, तो उसे भी पूरी तरह अवैध ही माना जाएगा.
फैसले का विरोध और सियासत गरमाई
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद हाईवे किनारे कारोबार करने वाले लोगों में हड़कंप मच गया है. पूर्व विधायक और कांग्रेस जिलाध्यक्ष इंद्राज गुर्जर ने इस फैसले पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे लाखों लोगों का भारी नुकसान होगा.
उन्होंने कहा, “लोगों ने कर्ज लेकर हाईवे के किनारे अपने व्यवसाय और घर बनाए हैं, अब उनका क्या होगा? हम मांग करते हैं कि राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाए, तभी लोगों का भला हो सकता है.” गुर्जर ने प्रदेश की भजनलाल सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह से चुप्पी साधे बैठी है, जबकि हजारों लोगों का व्यापार ठप होने की कगार पर है.