राजस्थान विधानसभा में स्थानीय निकाय और पंचायतीराज चुनाव से जुड़े महत्वपूर्ण संशोधन बिल आज 9 मार्च को पेश किए जाएंगे. इन बिलों के पास होने के बाद 2 से ज्यादा बच्चों वाले लोगों को भी पंचायत और नगर निकाय चुनाव लड़ने की अनुमति मिल सकेगी. अभी तक ऐसे उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोका गया था.
राज्य सरकार विधानसभा में दो अहम विधेयक पेश करने जा रही है. इनमें राजस्थान पंचायतीराज संशोधन बिल-2026 और नगरपालिका संशोधन बिल-2026 शामिल हैं. इन दोनों बिलों का उद्देश्य स्थानीय निकाय चुनाव में उम्मीदवार बनने की पात्रता से जुड़ी 2 बच्चों की अनिवार्यता को समाप्त करना है.
सरकार ने हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में इन दोनों विधेयकों को मंजूरी दे दी थी. विधानसभा में पारित होने के बाद इन्हें कानूनी रूप दिया जाएगा. इसके बाद पंचायत और शहरी निकायों के चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए बच्चों की संख्या से जुड़ी कोई बाध्यता नहीं रहेगी.
31 साल पुराना नियम खत्म करने की तैयारी
राजस्थान में दो बच्चों की अनिवार्यता का नियम करीब तीन दशक पहले लागू किया गया था. वर्ष 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत की सरकार ने यह प्रावधान लागू किया था. इसके तहत दो से ज्यादा बच्चों वाले लोगों को पंचायत और शहरी निकाय चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया गया था.
अब राज्य सरकार करीब 31 साल बाद इस नियम को समाप्त करने की तैयारी कर रही है. सरकार का मानना है कि इस प्रावधान को हटाने से अधिक लोगों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलेगा और स्थानीय स्तर पर प्रतिनिधित्व का दायरा बढ़ेगा.
इन पदों के चुनाव पर लागू था नियम
अब तक यह नियम कई स्थानीय पदों के चुनाव पर लागू था. इनमें वार्ड पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति प्रधान और जिला प्रमुख जैसे पद शामिल थे. इसके अलावा शहरी निकायों में पार्षद, नगर पालिका अध्यक्ष, सभापति और मेयर के चुनाव में भी यही शर्त लागू थी. पहले दो से ज्यादा बच्चों वाले उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ सकते थे. पंचायत और नगर निकाय दोनों चुनावों में यह नियम लागू था. कई संभावित उम्मीदवार इस कारण चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो जाते थे.
पंचायत चुनाव की तारीखों पर अभी अनिश्चितता
हालांकि इन संशोधनों के बावजूद पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है. जानकारी के अनुसार आयोग को 31 मार्च 2026 तक रिपोर्ट सौंपनी है, लेकिन अभी तक सभी आवश्यक आंकड़े आयोग को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि पंचायत चुनाव की तारीखों के ऐलान के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है. जब तक आयोग को पूरी जानकारी नहीं मिलती, तब तक चुनाव कार्यक्रम तय होना मुश्किल माना जा रहा है.