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राजस्थान: देवनारायण मंदिर के पट खुलने तक MLA भडाना ने त्यागे अन्न-जूते, 54 साल से लगा है ताला

राजस्थान की राजनीति में जनभावना और गहरी आस्था का एक विरला उदाहरण देखने को मिल रहा है. भीलवाड़ा जिले की मांडल विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक उदयलाल भडाना ने अपने क्षेत्र में स्थित भगवान देवनारायण के मंदिर के पट खुलवाने के लिए एक बेहद कठोर प्रतिज्ञा ली है. मंदिर पर पिछले करीब 50 वर्षों से ताला जड़ा हुआ है, जिसे खुलवाने के लिए विधायक ने अपनी सुख-सुविधाओं का त्याग कर दिया है.

क्या है विधायक उदयलाल भडाना की अनोखी प्रतिज्ञा?

विधायक भडाना ने संकल्प लिया है कि जब तक मांडल कस्बे में स्थित भगवान देवनारायण के देवरे (मंदिर) के ताले नहीं खुलेंगे, तब तक वे तीन कड़े नियमों का पालन करेंगे:

  • पैरों में जूते-चप्पल नहीं पहनेंगे.
  • भोजन में अन्न ग्रहण नहीं करेंगे.
  • अपने बाल और दाढ़ी नहीं कटवाएंगे.

1970 के विवाद के कारण लगा था ताला

विधायक भडाना के अनुसार, इस मंदिर के बंद होने के पीछे दशकों पुराना एक विवाद है:

  • विवाद की जड़: वर्ष 1970 में मंदिर परिसर की जमीन को लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया था. इसके बाद प्रशासन ने एहतियातन कार्रवाई करते हुए मंदिर के दरवाजे पर ताला जड़ दिया था.
  • अदालती फैसले: इस मामले में लंबी कानूनी लड़ाई चली है. वर्ष 2000 में भीलवाड़ा कोर्ट और 2010 में मांडल कोर्ट ने अपने फैसलों में स्पष्ट किया था कि यह मंदिर हिंदू और गुर्जर समाज का देवरा है और यह किसी भी सूरत में वक्फ संपत्ति नहीं है.
  • वर्तमान स्थिति: विधायक का आरोप है कि अदालती फैसलों के बावजूद कुछ लोग इसे वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताकर मामला ट्रिब्यूनल में ले गए. जबकि, राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि राजस्थान सरकार के नाम ‘आबादी भूमि’ के रूप में दर्ज है.

जनता से किया था वादा, CM से मिला आश्वासन

विधायक भडाना का कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान मांडल की जनता ने उनसे इस मंदिर को खुलवाने की बड़ी उम्मीद जताई थी. जनता से किए इसी वादे को पूरा करने के लिए उन्होंने यह कठोर प्रतिज्ञा ली है.

इस संवेदनशील मुद्दे पर उन्होंने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से भी मुलाकात की है. सीएम ने उन्हें आश्वस्त किया है कि संविधान और कानून के दायरे में रहते हुए जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाला जाएगा.

अब सभी की निगाहें मंदिर के तालों पर

विधायक भडाना स्पष्ट कर चुके हैं कि वे न्यायिक प्रक्रिया का पूरा सम्मान करते हैं और कानूनी तरीके से ही मंदिर के द्वार खुलवाना चाहते हैं. अब क्षेत्र की जनता और समर्थकों को उस दिन का बेसब्री से इंतजार है जब मंदिर के ताले खुलेंगे. चर्चा तो यह भी है कि जिस दिन ऐसा होगा, शायद खुद मुख्यमंत्री वहां पहुंचकर विधायक को जूते पहनाकर उनकी प्रतिज्ञा पूरी करवाएं.

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