प्रयागराज में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश में पार्कों, खेल मैदानों और खुले स्थानों को सुरक्षित रखने को लेकर एक अहम निर्देश दिया है. अदालत ने राज्य के सभी मंडलायुक्तों और संबंधित प्राधिकरणों को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद सभी पार्कों, खेल मैदानों और खुले स्थानों की पूरी सूची तैयार करें. जानकारी के अनुसार, इन स्थानों को उत्तर प्रदेश पार्क, खेल का मैदान और खुली जगह संरक्षण और विनियमन अधिनियम 1975 के तहत दर्ज किया जाए.
इस आदेश का सुनिश्चित करें पालन- अदालत
अदालत की यह टिप्पणी उस समय आई जब सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि 1975 के इस कानून और 2005 में बनाए गए नियमों के बावजूद अब तक पूरे उत्तर प्रदेश में पार्कों, खेल मैदानों और खुले स्थानों की कोई पूरी आधिकारिक सूची तैयार नहीं की गई है. अदालत ने राज्य सरकार से कहा है कि वह इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें और सभी जगहों का पूरा विवरण अदालत के सामने प्रस्तुत किया जाए.
यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की पीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया. यह याचिका धर्मपाल यादव नाम के व्यक्ति ने दायर की थी. याचिका में जनेश्वर मिश्र पार्क के कथित व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई थी.
ये भी पढ़िए- UP Fuel Shortage: यूपी में 17-18 दिन का पेट्रोल-डीजल स्टॉक, स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर संजय भंडारी का बड़ा दावा
पार्कों और खेल मैदानों को सुरक्षित रखना है कानून का उद्देश्य- अदालत
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य पार्कों, खेल मैदानों और खुले स्थानों को सुरक्षित रखना और उनका सही उपयोग सुनिश्चित करना है. अगर इन स्थानों को अधिनियम 1975 के तहत सूचीबद्ध कर दिया जाता है, तो उनका इस्तेमाल केवल उसी उद्देश्य के लिए किया जा सकेगा जिसके लिए उनका उपयोग 1975 से पहले किया जाता था.
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी पार्क, खेल मैदान या खुले स्थान का उपयोग किसी अन्य काम के लिए करना हो, तो इसके लिए संबंधित प्राधिकरण से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा. मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी.
ये भी पढ़िए- हरीश राणा को इच्छा मृत्यु देने की प्रक्रिया क्या है? भावुक पिता अशोक ने बताया, कहा- पहले फूड पाइप…