ईरान-इजरायल युद्ध की खबरों के बीच महोबा में सिलेंडर न मिलने से उपभोक्ता परेशान हैं. शहर के मकानियापुरा स्थित महोबा गैस सर्विस पर उपभोक्ताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. जहां एक तरफ लोग इसे युद्ध का असर और महंगाई की मार बता रहे हैं, वहीं एजेंसी सर्वर डाउन होने का हवाला दे रही है.
दरअसल, महोबा में इन दिनों रसोई का बजट और व्यवस्था दोनों पटरी से उतरती नजर आ रही हैं. शहर के मकानियापुरा इलाके में संचालित महोबा गैस सर्विस केंद्र के बाहर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं. आलम यह है कि लोग अपना कामकाज छोड़कर घंटों लाइन में खड़े हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है.
‘धरातल पर स्थिति बेहद खराब’
स्थानीय उपभोक्ता अरुण कुमार, जो एक सरकारी कर्मचारी हैं, वे बताते हैं कि छुट्टी लेकर गैस बुक कराने आए थे, लेकिन भारी भीड़ के कारण कोई सुनवाई नहीं हो रही. अरुण का कहना है कि सरकार भले ही सब ठीक होने का दावा करे, लेकिन धरातल पर स्थिति बेहद खराब है.
‘LPG के दामों में बढ़ोत्तरी ने आम आदमी की तोड़ी कमर’
वहीं, अशोक कुमार सोनी जैसे उपभोक्ताओं के मन में वैश्विक परिस्थितियों को लेकर डर है. चर्चा है कि ईरान-इजरायल युद्ध के कारण पेट्रोलियम की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. त्योहारों के इस सीजन में सिलेंडर के दामों में हुई 60 रुपये की बढ़ोतरी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है.
‘सर्वर डाउन का हवाला देकर नहीं की जा रही बुकिंग’
इसी तरह एक अन्य उपभोक्ता जिनका संदीप कुमार राजपूत है, संदीप कुमार राजपूत बताते हैं कि एजेंसी वाले सर्वर डाउन होने की बात कहकर बुकिंग नहीं कर रहे हैं. एक सिलेंडर के लिए लोगों का पूरा दिन बर्बाद हो रहा है, जिससे दिहाड़ी मजदूर और किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.
गैस एजेंसी वाले बोले- नहीं है स्टॉक की कमी
हालांकि, एजेंसी के कर्मचारी कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. वितरण कर्मचारी बलराम के मुताबिक, स्टॉक की कोई कमी नहीं है. गोदाम और गाड़ियों में लगभग 857 सिलेंडर मौजूद हैं, लेकिन इंडियन ऑयल कंपनी का सर्वर ठप होने की वजह से बुकिंग नहीं हो पा रही है. बुकिंग कर्मचारी रामभक्त राठौर ने बताया कि उपभोक्ताओं के मोबाइल पर मैसेज नहीं आ रहे हैं और सिस्टम काम नहीं कर रहा है.
अब सवाल यह है कि यदि स्टॉक पर्याप्त है, तो तकनीकी खामियों को दूर कर जनता को राहत क्यों नहीं दी जा रही? युद्ध की अफवाहों और महंगाई के बीच महोबा का आम नागरिक अब सीधे सरकार से दखल की मांग कर रहा है.