गृह मंत्रालय की ओर से पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत रद्द किए जाने पर एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने भी खुशी जताई है. साथ ही केंद्र सरकार को घेरते हुए सवाल किया कि आपने 6 महीने तक एक बेकसूर इंसान को जेल में डाल दिया, इसकी भरपाई कौन करेगा?
AIMIM नेता वारिस पठान ने कहा, ”ये बड़ी खुशी की बात है कि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जोधपुर जेल से रिहा हो गए. सरकार ने उनके खिलाफ जो कानून लगाया था उसे हटा दिया. तो मैं पूछना चाहूंगा कि सोनम वांगचुक ने जो 6 महीना जेल में बिताया, जो बेकसूर थे, उनके 6 महीने की जेल की भरपाई कौन करेगा. ये एक रोल मॉडल हैं, जिनके ऊपर फिल्म भी बनी थी ‘थ्री इडियट्स’ अगर आपको याद होगा.”
Mumbai, Maharashtra: On the Home Ministry revoking the detention of activist Sonam Wangchuk under the NSA, AIMIM leader Waris Pathan says, “This is a matter of great happiness… but first you put him in jail, and then you release him” pic.twitter.com/WSARMLfE6d
— IANS (@ians_india) March 14, 2026
वांगचुक संवैधानिक तौर से अपना प्रदर्शन कर रहे थे- पठान
उन्होंने आगे कहा, ”ये उस तरह के व्यक्ति हैं जो जलवायु के मुद्दे को लेकर इतनी लड़ाई लड़ रहे थे. वो संवैधानिक तौर से अपना प्रदर्शन कर रहे थे. उनके ऊपर आप इतनी सख्त धाराएं लगाकर उन्हें जेल में डाल देते हो, बाद में 6 महीने के बाद उनको छोड़ दिया जाता है. बड़ी खुशी की बात है छोड़ दिया लेकिन सरकार की नीति पर मेरा सवाल है कि आपने 6 महीने एक बेकसूर इंसान को जेल में डाल दिया. हम तो यह भी चाहेंगे कि लद्दाख के अन्य लोगों को जिन्हें धरना-प्रदर्शन के दौरान जेल में डाल दिया गया था, उनको भी सरकार रिहा कर दे.”
गृह मंत्रालय ने वांगचुक की हिरासत रद्द की
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शनिवार (14 मार्च) को एक बयान जारी करते हुए कहा कि विचार-विमर्श के बाद सरकार ने सोनम वांगचुक की हिरासत तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया. मंत्रालय ने यह भी कहा कि सरकार लद्दाख की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी उपाय प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है.
पिछले साल 26 सितंबर को वांगचुक को हिरासत में लिया गया
गौरतलब है कि लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के प्रावधानों के तहत 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था. 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसक प्रदर्शन हुआ था. केंद्र सरकार का कहना है कि 24 सितंबर 2025 को लेह में उत्पन्न हुई गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए वांगचुक के खिलाफ कार्रवाई की गई थी.