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बिहार में राज्यसभा की एक सीट पर टकराव, AIMIM नेता बोले- बिना बातचीत के RJD को समर्थन नहीं

राज्यसभा के लिए बिहार के पांच सीटों का नामांकन 5 मार्च को खत्म हो चुका है. NDA की ओर से पांचो सीट पर कैंडिडेट ने पर्चा दाखिल कर दिया है. विपक्ष में आरजेडी से रामधारी सिंह ने पर्चा दाखिल किया है. 16 मार्च को मतदान होने हैं, इसमें चार सीट में दो सीट पर जेडीयू और दो सीट पर बीजेपी का जितना कंफर्म है तो एक सीटों पर चुनाव होना है. विपक्ष के पास संख्या बल कम है ऐसे में AIMIM का साथ लेना जरूरी माना जा रहा है. अब असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसीन ने साफ कर दिया है कि जब तक तेजस्वी यादव हमारे बड़े नेता से बात नहीं करेंगे तब तक समर्थन नहीं दिया जाएगा.

2026, 28 या 30 के राज्यसभा चुनाव में भी विपक्ष को AIMIM की जरूरत

AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन ने वीडियो जारी करके कहा है कि 2026 के राज्यसभा का चुनाव हो या आने वाला 2028 या 2030 का चुनाव विपक्ष को AIMIM की जरूरत होगी. हमने मांग किया था कि राज्यसभा में हमारी पार्टी को समर्थन करिए  इसके लिए हमारे प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने तेजस्वी यादव से मुलाकात की थी. तेजस्वी यादव ने उन्हें कहा भी था कि ठीक है इस पर हम जवाब देंगे .लेकिन अफसोस कि अबतक कोई खबर नहीं आई

ऐसा लग रहा है कि आरजेडी बीजेपी से बात कर रही है कि सभी पांच सीट एनडीए को ही जाएगा. क्योंकि एआईएमआईएम के बगैर तो विपक्ष को जितना संभव नहीं है तो फिर रामधारी सिंह का नामांकन एक खानापूर्ति है. उन्होंने कहा कि हम बगैर कोई शर्त के समर्थन नहीं कर सकते हैं, हम किसी के मोहताज नहीं हैं. उन्होंने कहा कि हमारा स्टैंड क्लियर है कि हम बीजेपी के खिलाफ कल भी थे और आज भी हैं, लेकिन उनकी ओर से कोई संदेश नहीं आया है ,जबकि 35 MLA ही महागठबंधन उनके पास भी है. 5 विधायक हमारे पास है और एक विधायक बसपा का भी है, उनसे भी बात नहीं की गई है.

अगर समर्थन चाहिए तो हमारे सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी से बात करें

आदिल हसन ने साफ तौर पर कहा है कि अगर आपको समर्थन लेना है तो हमारे सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी या बिहार के नेता अख्तरुल इमान साहब से बात करनी होगी अगर बात नहीं होती है तो हम कतई समर्थन नहीं करेंगे .क्योंकि सम्मान से समझौता एआईएमआईएम कभी समझौता नहीं कर सकती है. उन्होंने कहा कि ततेलंगाना में भी दूसरी सीट के लिए एआईएमआईएम के विधायकों की जरूरत थी तो वहां के मुख्यमंत्री ने हमारे ओवैसी साहब से बात की उसके बाद समर्थन दिया गया और हम हमारे विधायक गए. इसी तरह बिहार में भी बगैर बात किए हुए समर्थन नहीं मिलेगा.

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