यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा देश के सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक मानी जाती है. हर साल रिजल्ट आने के बाद सफल उम्मीदवारों की सफलता की कहानी चर्चा में रहती है. हालांकि, इस बार परीक्षा को लेकर झूठे दावे भी सामने आए हैं जो विवाद का कारण बने हैं. हाल ही में एक मामला उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से सामने आया है, जब एक महिला ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 113 वीं रैंक हासिल करने का दावा किया था, लेकिन प्रशासनिक जांच में यह दावा गलत पाया गया. इससे पहले बिहार में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जहां आकांक्षा सिंह नाम की महिला ने 301 वीं रैंक मिलने का दावा किया था, जिसे बाद में आयोग ने गलत बताया था.
बुलंदशहर के शिखा गौतम के दावे की खुली पाेल
सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की रहने वाली शिखा गौतम ने दावा किया है कि उन्होंने 113 वीं रैंक हासिल की है और उनका चयन आईएएस के लिए हुआ है. इसके बाद यह खबर तेजी से फैल गई और स्थानीय स्तर पर उनकी सफलता की खूब चर्चा होने लगी. शिखा को चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की बेटी बताया गया, इस वजह से उनकी कहानी ने लोगों का ध्यान खींचा. कई जगह पर उनका स्वागत किया गया, ढोल नगाड़ों के साथ फुल-मालाएं पहनाकर सम्मानित किया गया और मीडिया में भी चपरासी की बेटी बनी आईएएस जैसी खबरें चलने लगी. इस बीच दिल्ली की रहने वाली एक दूसरी शिखा ने दावा किया कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 113वीं रैंक उनकी है, उन्होंने इस मामले को लेकर आयोग को ईमेल भेजकर स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की. इसके बाद मामला प्रशासन तक पहुंचा और जांच शुरू कराई गई.
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यूपीएससी के निर्देश पर प्रशासन ने कराई जांच
दिल्ली की शिखा की शिकायत के बाद यूपीएससी ने बुलंदशहर की जिलाधिकारी को मामले की जांच करने के निर्देश दिए. जिलाधिकारी ने इस मामले की जांच के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी. इसके तहत सदर तहसीलदार मनोज रावत को शिखा गौतम के घर भेज कर जांच कराई गई. जांच के दौरान परिवार से संबंधित डॉक्यूमेंट और प्रमाण पत्र मांगे गए. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार वह सही सबूत नहीं दे सके. बाद में परिवार ने अपनी गलती मानते हुए दिल्ली की शिखा के चयन को सही बताया.
मेंस परीक्षा भी पास नहीं कर पाई थी बुलंदशहर की शिखा
स्थानीय प्रशासन की जांच में यह भी सामने आया कि बुलंदशहर की शिखा गौतम यूपीएससी की मुख्य परीक्षा यानी मेंस भी पास नहीं कर पाई थी. इसी कारण उनका इंटरव्यू के लिए चयन भी नहीं हुआ था. जांच में यह भी पाया गया कि उनके डॉक्यूमेंट में नाम शिखा गौतम नहीं बल्कि शिखा रानी लिखा हुआ है. वहीं मामले में सामने आए तथ्यों के बाद यह क्लियर हो गया कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 113वीं रैंक दिल्ली के रहने वाली शिखा को मिली. इसके बाद सोशल मीडिया पर भी उनके चयन से जुड़े कई प्रमाण सामने आए हैं. रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली की शिखा फिलहाल हरियाणा में ब्लॉक विकास एवं चयनित अधिकारी के पद पर कार्यरत है.
इससे पहले बिहार में भी सामने आया ऐसा मामला
इससे पहले बिहार में भी सिविल सेवा परीक्षा को लेकर ऐसा ही विवाद सामने आया था. बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले आकांक्षा सिंह ने दावा किया था कि उनको यूपीएससी में 301 वीं रैंक मिली है. लेकिन बाद में आयोग में स्पष्टीकरण जारी कर बताया कि 301 वीं रैंक उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की आकांक्षा सिंह की है. जांच में यह भी सामने आया था, बिहार की आकांक्षा के एडमिट कार्ड के क्यूआर कोड में रोल नंबर अलग दिखाई दे रहा था. इसके बाद उनका दावा गलत साबित हुआ.
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