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बिहार: एक अप्रैल से राजस्व विभाग में बढ़ेगा AI का उपयोग, हर जिले में होगा सेल, क्या होगा फायदा?

बिहार सरकार राजस्व प्रशासन को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और दक्ष बनाने की दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीकों के उपयोग की शुरुआत करने जा रही है. इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर सचिव आजीव वत्सराज ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बीते बुधवार (11 मार्च, 2026) को कहा कि बिहार सरकार राजस्व प्रशासन को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और जनोन्मुख बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है. जिलों में एआई सेल के गठन और प्रशिक्षण की व्यवस्था से प्रशासनिक कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार आएगा.

उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि तकनीक के माध्यम से आम लोगों को तेज, सरल और विश्वसनीय सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा ‘ईज ऑफ लिविंग’ के लक्ष्य को प्रभावी रूप से हासिल किया जा सके.” 

पांच सदस्यीय एआई सेल में कौन-कौन होगा?

बताया गया कि प्रत्येक जिले में अपर समाहर्ता (राजस्व) की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एआई सेल का गठन किया जाएगा. इसमें जिला के आईटी मैनेजर, एक भूमि सुधार उप समाहर्ता, एक अंचल अधिकारी और एक राजस्व अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे. यह कोषांग जिला स्तर पर एआई के उपयोग से जुड़े निर्णय लेने वाली सर्वोच्च समिति के रूप में कार्य करेगा. एआई सेल का एक महत्वपूर्ण कार्य अधिकारियों और कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से एआई प्रशिक्षण के लिए नामित करना होगा.

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साथ ही आई पाठ्यक्रम लागू कर परीक्षा आयोजित की जाएगी और मानक स्तर प्राप्त करने वाले कर्मियों को जिलाधिकारी के आदेश से प्रमाण-पत्र भी दिया जा सकेगा. विभाग ने निर्देश दिया है कि प्रारंभिक स्तर पर एक अप्रैल से राजस्व प्रशासन में एआई का उपयोग शुरू करने की व्यवस्था की जाए. इसके लिए मुख्य सचिव द्वारा जारी एआई टूल्स की सूची भी जिलों को उपलब्ध कराई गई है.

निर्देश में विभागीय बैठकों और दैनिक कार्यों में मुफ्त एआई सहायक चैट जीपीटी के उपयोग को भी प्रोत्साहित करने की बात कही गई है, ताकि प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी और तेज बनाया जा सके. जिलाधिकारियों से अपील की गई है कि एआई टूल्स के उपयोग के माध्यम से कर्मचारियों में जागरूकता बढ़ाई जाए.

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