पश्चिम बंगाल में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और ममता बनर्जी सरकार पर करारा प्रहार किया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कड़ा बयान जारी करते हुए सीएम योगी ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और अक्षम्य अपराध करार दिया है.
मुख्यमंत्री योगी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह केवल देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं है. उन्होंने इसे सीधे तौर पर भारतीय लोकतंत्र, मातृशक्ति और संपूर्ण जनजातीय समाज की अस्मिता पर गहरी चोट बताया है. राष्ट्रपति मुर्मू संथाल जनजाति से आती हैं, और योगी ने इसे ‘संथाल संस्कृति’ के प्रति टीएमसी का सीधा दुराग्रह करार दिया है.
मा. राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी के प्रति पश्चिम बंगाल में हुआ व्यवहार अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और अक्षम्य है। यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र, मातृशक्ति और जनजातीय समाज की अस्मिता का अपमान है।
राष्ट्रपति का पद भारतीय गणतंत्र की सर्वोच्च संवैधानिक…
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) March 7, 2026
TMC की ‘ओछी मानसिकता’ की कड़ी आलोचना
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने अपने पोस्ट में पश्चिम बंगाल के सत्तारूढ़ दल (TMC) को आड़े हाथों लेते हुए उनकी कड़ी आलोचना की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति का पद भारतीय गणतंत्र की सर्वोच्च संवैधानिक गरिमा का प्रतीक है और इस पद के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार की असंवेदनशीलता या खिलवाड़ देश को कतई स्वीकार्य नहीं है. सीएम योगी ने कड़े शब्दों में कहा कि टीएमसी का यह अमर्यादित आचरण उनके राजनीतिक अहंकार और ओछी मानसिकता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है.
‘बिना विलंब सार्वजनिक क्षमा मांगे बंगाल सरकार’
इस कृत्य से पूरा देश आहत है, यह कहते हुए यूपी के मुख्यमंत्री ने ममता बनर्जी सरकार से तत्काल माफी की मांग की है. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार को अपने इस अमर्यादित और असंवैधानिक आचरण के लिए बिना किसी विलंब के पूरे देश से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी चाहिए.
सियासी गलियारों में तेज हुई हलचल
सीएम योगी के इस कड़े रुख के बाद बीजेपी और टीएमसी के बीच राजनीतिक तकरार और तेज हो गई है. बीजेपी इस मुद्दे को जनजातीय समाज और आधी आबादी (महिलाओं) के सम्मान से जोड़कर राष्ट्रीय स्तर पर उठा रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद के अपमान का यह मुद्दा आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला सकता है.