बिहार के सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार गुरुवार (12 मार्च) को नालंदा में अपने पुश्तैनी गांव कल्याण बीघा पहुंचे. यहां मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके पिता ने 20 सालों में काम किया है, कोशिश होगी कि उसे आगे बढ़ाएं और जनता का विश्वास पाएं. निशांत ने कहा कि बिहार की जनता का उन्हें स्नेह और आशीर्वाद मिल रहा है. पार्टी के कार्यकर्ताओं और सीनियर नेताओं का भी प्यार मिल रहा है और इसके लिए वो आभार व्यक्त करते हैं.
बता दें कि अपनी राजनीतिक पारी का आगाज करने के बाद निशांत कुमार लगातार पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहे हैं. पार्टी में शामिल होने से पहले ही ये बता दिया गया था कि निशांत कुमार पूरे बिहार की यात्रा पर निकलेंगे. फिलहाल वो जहां जा रहे हैं, पार्टी के लोग फूलों से उनका स्वागत कर रहे हैं.
#WATCH | Nalanda, Bihar: JDU leader Nishant Kumar says, “I express my gratitude for the blessings I am receiving from the people of Bihar… I will try to carry forward the work that my father (Nitish Kumar) has done over the past 20 years…” pic.twitter.com/XlbOXYeIqv
— ANI (@ANI) March 12, 2026
निशांत कुमार की जिम्मेदारी अभी तय नहीं
निशांत कुमार को पार्टी में अभी किसी तरह की जिम्मेदारी नहीं दी गई है. बुधवार (11 मार्च) को जब निशांत पार्टी के प्रदेश कार्यालय पहुंचे, जहां मौजूद कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. कार्यालय पहुंचते ही समर्थकों ने उन्हें घेर लिया और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी. ‘बिहार का मुख्यमंत्री कैसा हो, निशांत कुमार जैसा हो’ जैसे नारों से पूरा कार्यालय गूंज उठा.
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8 मार्च को जेडीयू में शामिल हुए निशांत कुमार
8 मार्च को निशांत कुमार ने औपचारिक रूप से जेडीयू की सदस्यता ग्रहण की थी. उन्हें पार्टी की सदस्यता जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने दिलाई थी. बुधवार को जेडीयू कार्यालय में आयोजित ‘जनता दरबार’ में भी वह पहुंचे और उन्होंने आम लोगों की समस्याएं सुनीं. जनता दरबार की यह परंपरा लंबे समय से पार्टी कार्यालय में चल रही है, जहां आम नागरिक अपनी समस्याएं लेकर आते हैं.
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निशांत कुमार पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
राजनीतिक विश्लेषक अरुण कुमार पांडे के अनुसार, निशांत कुमार की सक्रियता को केवल एक सामान्य राजनीतिक शुरुआत के तौर पर नहीं देखा जा रहा है क्योंकि बिहार की राजनीति में पिछले कुछ समय से यह चर्चा भी तेज है कि आने वाले समय में जेडीयू को नई पीढ़ी का नेतृत्व तैयार करना पड़ सकता है. पांडे का मानना है कि यह कदम जेडीयू के संगठन को मजबूत करने की रणनीति भी हो सकता है. उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही आंतरिक असंतोष की चर्चाओं और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच यदि नई पीढ़ी को सामने लाया जाता है, तो इससे कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा हो सकता है.