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नोरा फतेही के खिलाफ फतवा जारी, एक्ट्रेस के विवादित गाने पर मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता नाराज

बॉलीवुड अभिनेत्री नोरा फतेही और संजय दत्त की फिल्म ‘केडी: द डेविल’ का गाना सरके चुनर तेरी सरके विवादों में घिर चुका है. अब इस विवादित गाने को लेकर मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता ने भी विरोध जताया है और नोरा फतेही के विवादित गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ को लेकर उनके खिलाफ फतवा जारी किया है.

मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता के शाफी चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफ्राहीम हुसैन ने इस गाने में कथित तौर पर दिखाए गए आपत्तिजनक और अश्लील डांस को लेकर फतवा जारी किया गया है. उन्होंने कहा कि इस तरह के कंटेंट को लेकर आम जनता में विरोध देखने को मिल रहा है और इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा भी नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है.

इस फतवे में कहा गया है आजकल फिल्म “The Devil” के एक गाने में आपत्तिजनक व अश्लील डांस होने की खबरें सामने आई हैं, जिस पर आम जनता में विरोध हो रहा है. लोग यह जानना चाहते हैं कि इस तरह के गानों, डांस और अश्लील कंटेंट के बारे में इस्लाम का क्या हुक्म है?

जवाब (हुक्म-ए-शरीअत)

इस्लाम एक पाक दीन है जो हया (लज्जा), इफ्फत (पवित्रता) और अच्छे अख़लाक़ की तालीम देता है. कुरआन शरीफ (सूरह नूर 24:19) में साफ फरमाया गया है कि जो लोग समाज में बेहयाई (अश्लीलता) फैलाते हैं, उनके लिए सख्त अजाब है।

फतवे का निर्णय:

अश्लील गाने, नृत्य, आपत्तिजनक डांस बनाना, उनमें भाग लेना या उन्हें फैलाना इस्लाम में हराम (नाजायज) और गुनाह-ए-कबीरा है. ऐसे कंटेंट जो युवाओं, बच्चों और समाज के नैतिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाए, उससे दूर रहना वाजिब (जरूरी) है और उसकी निंदा की जाती है. यदि कोई कलाकार चाहे वह किसी भी धर्म या पृष्ठभूमि से हो, जैसे नोरा फतेही ऐसे कंटेंट में शामिल होता है तो उसका यह अमल इस्लामी शिक्षाओं के खिलाफ माना जाएगा.

फतवे की अपील व हिदायत:

फिल्म इंडस्ट्री और कलाकारों को चाहिए कि वे मर्यादित, सभ्य और समाजहित में कंटेंट प्रस्तुत करें. सरकार व संबंधित संस्थाओं से अपील है कि वे अश्लीलता पर नियंत्रण हेतु सख्त कदम उठाएं. आम जनता से कहा जाता है कि ऐसे कंटेंट का बहिष्कार करें और अपने परिवार व नई पीढ़ी को इससे सुरक्षित रखें.

फतवे का ख़ातिमा (अंतिम संदेश):

इस्लाम हया, इज्जत और पाकीज़गी का दीन है. हम सब पर यह जिम्मेदारी है कि हम अपने आचरण और समर्थन के माध्यम से समाज में भलाई, शराफत और नैतिकता को बढ़ावा दें.

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