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निशांत कुमार को राज्यसभा भेजा तो जदयू किससे मांगेगी कुर्बानी? हरिवंश या रामनाथ ठाकुर, समझें समीकरण

बिहार में 5 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव से पहले बड़ी खबर आ रही है. दावा है कि जनता दल यूनाइटेड के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार राज्य सभा जा सकते हैं. इन सब दावों के बीच सवाल उठ रहा है कि अगर निशांत, राज्यसभा गए तो उनकी जगह किसका पत्ता कटेगा?

बता दें जदयू की ओर से फिलहाल रामनाथ ठाकुर और हरिवंश नारायण राज्यसभा सांसद हैं. इनका कार्यकाल इस वर्ष अप्रैल में खत्म हो रहा है. अगर निशांत, राज्यसभा जाते हैं तो दोनों में से किसी एक का नाम रेस से हट जाएगा. अब यह देखना होगा कि  जदयू किससे कुर्बानी मांगेगी.  गौरतलब है कि ठाकुर, नाई जाति से आते हैं और हरिवंश नारायण सिंह क्षत्रिय वर्ग के हैं. 

हरिवंश नारायण को हटाया तो क्या होगा?

हरिवंश नारायण सिंह की बात करें तो यह नाम इसलिए अहम है क्योंकि वे राज्यसभा के उपसभापति हैं और संसदीय कार्यप्रणाली में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है. राष्ट्रीय स्तर पर जदयू की पहचान को स्थापित करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है. यदि उनकी जगह बदलाव होता है तो इसे जदयू के भीतर बड़ा बदलाव माना जाएगा. राज्य में विपक्ष को यह कहने का मौका भी मिल सकता है कि पार्टी नेतृत्व परिवार को आगे बढ़ाने के लिए वरिष्ठ चेहरों की कुर्बानी दे रही है.

रामनाथ से कुर्बानी मांग सकती है JDU?

वहीं रामनाथ ठाकुर का नाम सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है. वे पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की विरासत से जुड़े हैं और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) प्रतिनिधित्व का प्रमुख चेहरा माने जाते हैं. जदयू की राजनीति लंबे समय से सामाजिक संतुलन और पिछड़े-अति पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व पर आधारित रही है. अगर उनकी जगह निशांत को भेजा जाता है तो  इसका संदेश सीधे सामाजिक आधार पर जाएगा. अति पिछड़ा वर्ग बिहार की चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है.

निशांत की एंट्री क्यों?

निशांत कुमार की राज्यसभा में संभावित एंट्री को केवल एक संसदीय मनोनयन के रूप में नहीं देखा जा सकता है बल्कि इसे जदयू के नेतृत्व की अगली पीढ़ी को आगे लाने के संकेत के रूप में भी माना जा रहा है. अभी तक वब सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए हुए थे. यदि उन्हें राज्यसभा भेजा जाता है तो यह जदयू के भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम माना जाएगा.

इससे पहले जब कभी निशांत से सियासत में उनकी एंट्री पर सवाल किया गया तो या तो वह सब कुछ अपने पिता नीतीश कुमार पर छोड़ने नजर आए या फिर चुप्पी साध ली या सवाल ही टाल दिया.

अब यह देखना होगा कि अगर निशांत जदयू से राज्यसभा जाते हैं तो पार्टी किस वरिष्ठ नेता की कुर्बानी मांगेगी. इतना ही नहीं यदि ऐसा होता है तो बीजेपी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में जदयू भी उन्हीं पार्टियों की लिस्ट में शामिल हो जाएगी जिनके हाईकमांड के परिजन, बेटा या बेटी सियासत में दखल रखते हैं.

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