Nagpur Crime News: महाराष्ट्र के नागपुर शहर के हिंगना पुलिस थाना क्षेत्र के इसासनी इलाके में एक साठ वर्षीय वृद्ध महिला की जान सोशल मीडिया पर फैली झूठी अफवाहों के कारण जाते-जाते बची. महिला को बच्चों को चुराने वाले गिरोह का सदस्य समझकर भीड़ ने लात-घूसों से पीटा. पुलिस ने किसी तरह उसे सुरक्षित बचाया.
मिली जानकारी के अनुसार, 60 साल की महिला अस्पताल से अपनी नियमित दवा लेने के बाद घर लौट रही थी. थकान और दवा खाने के समय रुकने के कारण उसने पास के घर के सामने खेल रहे एक बच्चे से पानी मांगा. मराठी और हिंदी में ठीक से संवाद न कर पाने के कारण वृद्ध महिला अपनी बात सही तरह से नहीं रख सकी.
बैग में अपहरण का झूठा आरोप, वृद्ध महिला को पीटा गया
इसी दौरान पास में मौजूद एक महिला ने शोर मचाया कि वृद्ध महिला अपनी छोटी बेटी को बैग में डालकर अपहरण करने की कोशिश कर रही थी. इस झूठे आरोप के कारण भीड़ ने वृद्ध महिला पर हमला कर दिया. मराठी और हिंदी ठीक से न बोल पाने के कारण वृद्ध महिला अपनी रक्षा नहीं कर सकी. आरोप लगाने वाली महिला ने उसे लात-घूसों से पीटना शुरू किया, और आसपास मौजूद लोगों को भीड़ में शामिल होने के लिए उकसाया.
बच्चों को चुराने वाले गिरोह के सक्रिय होने का झूठा और बेबुनियाद दुष्प्रचार
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और वृद्ध महिला को भीड़ से बचाकर सुरक्षित पुलिस स्टेशन ले गई. महिला के बेटे और बहू को बुलाकर पूरे मामले की जांच की गई.
पुलिस ने बताया कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर बच्चों को चुराने वाले गिरोह के सक्रिय होने की अफवाहें फैली हुई हैं. इसी झूठे दुष्प्रचार के कारण वृद्ध महिला को किसी ने गिरोह का सदस्य समझकर बेरहमी से पीटा. पुलिस ने कहा कि महिला की जान सुरक्षित बच गई, लेकिन यह घटना पिछले वर्षों में नागपुर में हुई भीड़ हिंसा की घटनाओं की याद दिलाती है. 2012 में कलमना इलाके में नाथजोगी समुदाय के तीन लोग भी इसी तरह झूठे आरोपों की वजह से भीड़ द्वारा पीटकर मारे गए थे.