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दिल्ली: नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं पर टिप्पणी का मामला, आरोपी दंपति की जमानत पर फैसला सुरक्षित

साउथ दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में नॉर्थ ईस्ट की महिलाओं पर कथित नस्लीय टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तार दंपति की जमानत याचिका पर साकेत कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. अदालत मंगलवार (10 मार्च) को इस पर अपना आदेश सुनाएगी. एडिशनल सेशन जज समर विशाल की कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा. इस मामले में आरोपी हर्ष प्रिया सिंह और रूबी जैन को दिल्ली पुलिस ने 25 फरवरी को गिरफ्तार किया था. उन पर आरोप है कि उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर की तीन महिलाओं को गालियां दीं. इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.

पड़ोसियों के झगड़े को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया- वकील

साकेत कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से पेश वकील गौरव ने दलील दी कि यह मामला सिर्फ पड़ोसियों के बीच हुए झगड़े का है, जिसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बहस के दौरान आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल हुआ था लेकिन इसे नस्लीय भेदभाव का मामला नहीं माना जा सकता. वकील ने यह भी कहा कि आरोपियों को यह जानकारी नहीं थी कि शिकायतकर्ता महिलाएं आदिवासी समुदाय से हैं इसलिए एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम लागू नहीं होता. वकील ने दलील दी कि यह विवाद किराए के मकान के अंदर हुआ था जो कानून के अनुसार सार्वजनिक स्थान की श्रेणी में नहीं आता.

आरोपियों ने पुलिस कंट्रोल रूम को खुद किया कॉल- वकील

साकेत कोर्ट में बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि घटना के बाद पुलिस कंट्रोल रूम को कॉल खुद आरोपियों ने की थी क्योंकि वे भी दूसरे पक्ष की भाषा से डर गए थे. उनके मुताबिक मामले से जुड़े सभी सबूत पुलिस के पास हैं और आरोपी पहले ही जांच में सहयोग कर चुके हैं इसलिए अब उन्हें हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है. रूबी जैन की सेहत का मुद्दा उठाते हुए वकील ने कहा कि जेल में उनका इलाज ठीक से नहीं हो पा रहा है. उन्होंने अदालत से महिला होने के आधार पर विशेष जमानत देने की भी मांग की.

आरोपी दंपति की जमानत का विरोध

वहीं, शिकायतकर्ता लियी नोशी की ओर से पेश वकील ने जमानत का विरोध किया. उन्होंने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और जमानत मिलने पर आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि एक अहम प्रत्यक्षदर्शी, जो उस समय एसी लगाने आया इलेक्ट्रीशियन था, उसकी अभी जांच बाकी है. शिकायतकर्ता पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद आरोपियों ने महिलाओं पर समझौते का दबाव बनाने की कोशिश की थी. उन्हें मकान मालिक के घर बुलाकर मामला शांत करने के लिए कहा गया था. 

वकील ने कोर्ट को बताया कि घटना के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है. हालात ऐसे हो गए थे कि मणिपुर की एक लड़की को दिल्ली छोड़कर अपने घर वापस जाना पड़ा. फिलहाल अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है और अब मंगलवार को आदेश सुनाया जाएगा.

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