नई दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के गर्ल्स हॉस्टल परिसर में 12 मार्च की रात करीब 9.30 बजे कुछ लड़कों के घुसने और आपस में मारपीट करने का आरोप लगा है. हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं का कहना है कि यह सुरक्षा में बड़ी चूक है और ऐसे मामले पहले भी सामने आते रहे हैं.
बताया गया कि घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया है, जिसमें कुछ लड़के आपस में झगड़ते दिख रहे हैं और एक सुरक्षा गार्ड उन्हें परिसर से बाहर करने की कोशिश करता नजर आता है. हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.
छात्रा ने बताई पूरी घटना
हॉस्टल में रहने वाली बीए की छात्रा सान्या के अनुसार, 12 मार्च की रात करीब 9.30 बजे पांच से छह लड़के अचानक हॉस्टल परिसर में घुस आए. उस समय कुछ छात्राएं प्रवेश द्वार पर रजिस्टर में एंट्री कर रही थीं, तभी ये लड़के उन्हें धक्का देते हुए अंदर चले गए और आपस में झगड़ने लगे.
पीटीआई को दिए बयान में सान्या ने बताया कि यह क्लियर नहीं है कि हॉस्टल परिसर में घुसने वाले लड़के विश्वविद्यालय के छात्र थे या बाहरी. इस घटना ने हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. छात्राओं का कहना है कि परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कमजोर है.
छात्र संगठनों ने की जांच की मांग
घटना के बाद जामिया की स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) इकाई ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर घटना की निंदा की और विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल जांच की मांग की. संगठन का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की सुरक्षा चूक सामने आई है.
SFI के अनुसार, कैंपस और हॉस्टल परिसर के आसपास पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही हैं. संगठन ने मांग की कि दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाए.
कर्फ्यू नियमों और सुरक्षा पर उठे सवाल
जामिया के छात्र और SFI सदस्य अतीकुर रहमान ने कहा कि हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं पर सख्त कर्फ्यू नियम लागू किए जाते हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन उतना गंभीर नजर नहीं आता. उन्होंने कहा कि अगर छात्राएं रात 10 बजे के कर्फ्यू के बाद लौटती हैं तो उनसे अभिभावकों का पत्र मांगा जाता है.
रहमान का कहना है कि जब प्रशासन छात्राओं पर इतने सख्त नियम लागू करता है तो हॉस्टल परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उसकी जिम्मेदारी है. उधर, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) की जामिया इकाई ने भी घटना की निंदा करते हुए पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की है. पुलिस के अनुसार इस मामले में किसी तरह की PCR कॉल प्राप्त नहीं हुई है और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से भी तुरंत कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.