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जयपुर की जेम्स इंडस्ट्री पर युद्ध की गाज, इंपोर्ट-एक्सपोर्ट ठप, लाखों के नुकसान में व्यापारी

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का सीधा और नकारात्मक असर ‘पिंक सिटी’ जयपुर के मशहूर जेम्स एंड ज्वेलरी (Gems and Jewelry) कारोबार पर पड़ा है. 28 फरवरी से शुरू हुए इस तनाव के कारण दुनियाभर में जवाहरात तराशने का केंद्र माने जाने वाले जयपुर का कारोबार 80 फीसदी तक गिर गया है.

इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट ठप होने से न केवल व्यापारियों को लाखों का नुकसान हो रहा है, बल्कि रत्न तराशने वाले हजारों कारीगर और ब्रोकर बेरोजगार होकर बैठ गए हैं.

80 फीसदी काम ठप

दुनियाभर में ज्वेलरी में इस्तेमाल होने वाले बेशकीमती पत्थरों को तराशने का 70 फीसदी से ज्यादा काम अकेले जयपुर में होता है. युद्ध के कारण पिछले तीन हफ्तों में यह काम सिमटकर मात्र 20 फीसदी रह गया है.

जेम्स एक्सपर्ट गजेंद्र लोहिया के मुताबिक, इस इंडस्ट्री पर असर पड़ने से जयपुर के लगभग 1 लाख लोगों की आजीविका सीधे तौर पर प्रभावित हुई है. उनका मानना है कि युद्ध खत्म होने के कम से कम एक महीने बाद तक बाजार में मंदी छाई रहेगी.

टूट गई सप्लाई चेन

इन बेशकीमती पत्थरों का न तो राजस्थान में खनन होता है और न ही यहां इनकी खास खपत है. ये पत्थर मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट और अफ्रीकी देशों से जयपुर आयात (Import) किए जाते हैं. यहां तराशने के बाद तैयार जेम्स को खाड़ी देशों और यूरोपीय मार्केट्स में निर्यात (Export) किया जाता है. युद्ध के कारण आयात-निर्यात दोनों बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और बाजार अब सिर्फ लोकल डिमांड के भरोसे चल रहा है.

कारीगरों की ईद फीकी

बाजार के जानकारों और व्यापारियों के अनुसार हालात बेहद चिंताजनक हैं:

  • लोहिया ज्वेलर्स के आशीष लोहिया: पहले सोने-चांदी की आसमान छूती कीमतों ने बाजार में मंदी ला दी थी, अब युद्ध ने व्यापारियों की कमर पूरी तरह तोड़ दी है.
  • कारोबारी जमील खान: कोलकाता समेत कई जगहों से आए कारीगर बेरोजगार बैठे हैं, जिसके कारण इस बार उनकी ईद की खुशियां भी फीकी रह गईं.
  • नीलम मित्तल (अध्यक्ष, फोर्टी महिला विंग): सात समंदर पार हो रहे इस युद्ध ने जेम्स-ज्वेलरी ही नहीं, बल्कि राजस्थान के कई अन्य व्यापारिक क्षेत्रों और रोजगार पर भी गहरी चोट की है.

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